Home / धर्म / प्रभु इन्‍हें माफ कर देना….। Lord, forgive them ….

प्रभु इन्‍हें माफ कर देना….। Lord, forgive them ….

हे प्रभु इन्‍हें माफ कर देना यह नहीं जानते कि ये क्‍या कर रहे हैं। आज गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह के यह शब्‍द सबके कानों में पड रहे हैं। कैलेंडर के अनुसार वैसे यह अप्रैल में पड़ता हैं लेकिन इस बार 30 मार्च को ही पड़ रहा है। प्रभु ईसा मसीह का बलिदान दिवस आज पूरी दुनिया गुड फ्राई डे के रूप में मना रही है। इसी दिन ईसा मसीह ने मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राण त्‍यागे थे।

क्‍यों मनाते हैं गुड फ्राइडे। Why celebrate good friday

ईसाई धर्म मानने वालों के लिए गुड फ्राइडे का विशेष महत्व है। अनेक लोग इस बलिदान के लिए ईसा मसीह की कृतज्ञता व्यक्त करते हुए 40 तक उपवास भी रखते हैं, जो ‘लेंट’कहलाता है, तो कोई केवल शुक्रवार को ही उपवास रखकर प्रेयर (प्रार्थना) करते हैं। यह दिन प्रभु ईसा के उपदेशों और उनकी शिक्षाओं और वचनों को न केवल याद करने का दिन है, बल्कि उन्हें अमल लाने के लिए प्रेरित होने का दिन है। सलीब पर लटके हुए ईसा अंतिम शब्‍द ही उनकी महानता को रेखांकित करते हैं। यह वह उनके क्षमा की शक्ति की अन्यतम मिसाल है. सलीब पर लटकाए जाने के बाद मृत्यु पूर्व उनके मार्मिक और हृदयग्राही शब्द थे- ‘हे ईश्वर इन्हें क्षमा करें, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं। ईसा मसीह को जिस दिन सूली पर चढ़ाया गया और उन्होंने प्राण त्यागे थे, बाइबिल के अनुसार, उस दिन शुक्रवार यानी फ्राइडे था। इसलिए इस दिन को गुड फ्राइडे मनाया जाता है। यह अंग्रेज़ी कैलेंडर के हिसाब से प्रायः अप्रैल के महीने में पड़ता है। इस दिन ईसा मसीह ने अमानवीय यातनाएं सहते हुए अपने प्राणों का बलिदान किया था। ईसा मसीह को मानने वाले इस दिन को गुड फ्राइडे के रूप में मनाते हैं।

अंधविश्‍वास के खिलाफ लडाई। Fought against superstition

आज से लगभग दो हजार वर्ष पहले की घटना है। यह वह दौर था जब दुनिया के कई देशों में धर्म के नाम पर निरीह प्राणियों पर अत्‍याचार होते थे। यरुशलम में भी ऐसा ही दौर चल रहा था। यरुशलम के गैलिली प्रांत के नासरत निवासी ईसा युवा होने पर लोगों को मानवता, भाईचारा, एकता और शांति का उपदेश देकर लोगों में परमपिता परमेश्वर में आस्था जगाने लगे। प्रभु की शरण में जाने की बात कहने लगे। ईसा मसीह खुद को ईश्वर का पुत्र कहते थे और परमेश्वर के राज्य के आगमन और स्थापना की बातें करते थे। ईसा मसीह का ऐसा करना सब को नागवार गुजर रहा था। कथित धर्म गुरू प्रभु ईसा की जान के दुश्‍मन बन गये थे। ईसा मसीह ने धार्मिक अंधविश्वास फैलाने वाले रब्बियों (धर्मगुरुओं) को मानव जाति का शत्रु बताया। परम पिता में आस्‍था जगाने वाले ईसा की लोकप्रियता दिनो दिन बढ रही थी। ईसा मसीह के कल्‍याणकारी संदेशों से परेशान होकर धर्मगुरुओं ने रोम के शासक के कान भरने शुरू किए कि स्वयं को ईश्वरपुत्र बताना भारी पाप है और वह परमेश्वर के राज्य की बात करता है। आखिर कार प्रभु ईसा के खिलाफ षडयंत्र सफल हुआ। प्रभु ईसा को राजा के कोप का भाजन बनना पडा। कथित धम्रगुरुओं ने येनकेन-प्रकारेण साजिशें रचकर ईसा पर धर्म और राज्य की अवमानना का आरोप लगाकर सलीब (क्रूस) पर लटका कर मृत्यु-दंड देने का आदेश राजा से पारित करवा दिया।

सलीब पर लटका दिया। hanged on the cross

क्रूस पर लटकाए जाने से पूर्व ईसा को अनेक तरह की अमानवीय यातनाएं दी गईं। उनके सिर पर कांटों का ताज रखा गया। सलीब को अपने कंधे पर उठाकर ले जाने के लिए बाध्य किया गया। कोड़ों और चाबुक से शरीर लहुलुहान हो गया। उनपर थूका गया। उन्‍हें दिल दहला देने वाली यातनायें दी गईं। जब सारे अत्‍याचारों से जी भर गया तब प्रभु इ्रसा को दो अपराधियों के साथ सूली (सलीब/क्रूस) पर बेरहमी से कीलों से ठोक दिया गया।

ईसा के अंतिम शब्द । last words of Jesus

जिस जगह ईसा को सलीब पर चढ़ाया गया था, बाइबिल के अनुसार, वह स्थान गोलगोथा नामक एक ऊंची टेकरी (टीला) था. जब ईसा अपने प्राण त्याग रहे थे तो, उन्होंने ऊंची आवाज में परमेश्वर को पुकारा और कहा- ‘हे पिता! मैं अपनी आत्मा को तेरे हाथों सौंपता हूं.’हे प्रभु इन्‍हें माफ कर देना यह नहीं जानते कि ये क्‍या कर रहे हैं। ऐसा कहने के साथ ही प्रभु ईसा ने अपने प्राण त्याग दिए। कहा जाता है कि ईसा मसीह छह घंटे तक सलीब पर लटके रहे और यातना सहते रहे। बाइबिल के अनुसार, उनके सलीब पर चढ़ाए जाने के आखिरी तीन घंटों के दौरान दोपहर से अपराह्न 3 बजे तक पूरे देश में अंधेरा छाया रहा, जब एक चीख के बाद ईसा मसीह ने अपने प्राण त्यागे, तब उसी समय एक जलजला आया था, कब्रों की कपाटें टूट कर खुल गयीं और पवित्र मंदिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक फट गया था।

कैसे मनाते हैं गुड फ्राइडे। How celebrate good friday

गुड फ्राइडे के दिन ईसाई धर्म को मानने वाले अनुयायी गिरजाघर जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं। ईसा मसीह के जन्म क्रिसमस के कुछ ही दिन बाद ईसाई तपस्या, प्रायश्चित्त और उपवास का समय मनाते हैं। यह समय जो ‘ऐश वेडनस्डे’ से शुरू होकर ‘गुड फ्राइडे’ को खत्म होता है, ‘लेंट’ कहलाता है। जिस सलीब क्रॉस पर ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था उसके प्रतीक रूप में आस्थावानों की श्रद्धा स्वरूप लकड़ी का एक तख्ता गिरजाघरों में रखा जाता है। ईसा के अनुयायी एक-एक कर आकर उसे चूमते हैं और प्रभु को याद करते हैं। इसके बाद एक समारोह में प्रवचन, ध्यान और प्रार्थनाएँ की जाती हैं. इस दौरान श्रद्धालु प्रभु यीशु द्वारा तीन घंटे तक सलब पर भोगी गई पीड़ा को याद करते हैं। रात के समय कहीं-कहीं काले वस्त्र पहनकर शोक सभा भी करते हैं। कई जगह प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किया जाता है। चूँकि गुड फ्राइडे प्रायश्चित और प्रार्थना का दिन है अतः इस दिन गिरजाघरों में घंटियां नहीं बजाई जातीं। गुड फ्राइडे की तैयारी प्रार्थना और उपवास के रूप में चालीस दिन पहले से ही प्रारम्भ हो जाती है। इस दौरान शाकाहारी और सात्विक भोजन पर जोर दिया जाता है। गुड फ्राइडे के दिन ईसा के अन्तिम सात वाक्यों की विशेष व्याख्या की जाती है जो क्षमा, मेल-मिलाप, सहायता और त्याग पर केन्द्रित हैं।
गुड फ्राइडे के पर्व मनाने को सीधे तौर पर ऐसे समझा जा सकता है। बाइबल पाठ के पहले भाग में प्रभु यीशू के प्रति प्रेम और गुणगान की आवृत्ति या गायन होता है जो अक्सर एक से अधिक पाठकों या गायकों द्वारा किया जाता है। पहले चरण में प्रार्थना की एक श्रृंखला होती है जो चर्च, पोप, पादरी और चर्च में आने वाले गृहस्थों, प्रभु यीशु मसीह में विश्वास नहीं करने वालों, भगवान पर विश्वास नहीं करने वालों, सार्वजनिक कार्यालयों में काम करने वालों और विशेष तौर पर जरूरतमंद लोगों के लिए की जाती है।
इसके बा द गुड फ्राइडे के त्यौहार के दूसरे चरण में क्रॉस की पूजा की जाती है। एक क्रूसीफिक्स जिसमें एक खास पारम्परिक ढंग से यीशु के लिए गीत गाये जाते हैं। इसका तीसरा भाग होता है पवित्र प्रभु भोज का, जो इस त्यौहार की अंतिम कड़ी है। यह शुरू होती है आवर फादर के साथ लेकिन “रोटी तोड़ने की रस्म” और इससे संबंधित मंत्र का उच्चारण नहीं किया जाता। पवित्र गुरुवार की प्रार्थना सभा में प्रभु प्रसाद को भक्तों में वितरित किया जाता है।

About Ashutosh Srivastava

हिंदी पत्रकारिता में 21 वर्ष का अनुभव। दैनिक जागरण और अमर उजाला में लंबा समय दिया।

Check Also

सुख और खुशहाली लाता है शमी। Shami brings happiness and prosperity

ऐसी मान्यता है कि घर में शमी का पेड़ लगाने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त …