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बिना कंपनी की मंजूरी के कैसे निकालें PF । How to withdrawal PF without company permission in hindi

PF अकाउंट से खुलवाने से लेकर रुपये निकालने तक का काम बिना नियोक्ता के नहीं हो सकता। नियोक्ता का मतलब उस कंपनी से है जहां काम करते हैं। कई बार कंपनियां काम अटका देती हैं और कर्मचारियों को परेशान होना पड़ता है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। आप बिना कंपनी की मंजूरी के भी PF अकाउंट से रुपये निकाल सकते हैं।

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इसके लिए ईपीएफओ यानि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने व्यवस्था कर दी है। आप बिना कंपनी से मंजूरी लिए ही ऑनलाइन आवेदन कर अपने रुपये निकाल सकते हैं। इसके लिए आपको कोई बहुत लंबी चौड़ी प्रक्रिया का पालन नहीं करना है। आपका काम घर बैठे ऑनलाइन ही हो जाएगा।

बस आपके पास यूएएन यानि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर होना चाहिए। अगर अब तक आपने यूएएन नहीं प्राप्त किया है तो देर न करें। यह काम भी आप घर बैठे ही कर सकते हैं। यूएएन जेनरेट करने की प्रक्रिया जानने के लिए यहां पर क्लिक करें। आपका काम चंद मिनट के भीतर ही हो जाएगा।

बिना कंपनी की मंजूरी के PF अकाउंट से रुपये निकालने के लिए ईपीएफओ ने फार्म नंबर 19 जारी किया है। यह फार्म आप तभी भर सकेंगे जब आपके पास यूएएन नंबर तो हो ही, आपका PF अकाउंट भी आधार व बैंक अकाउंट से लिकं हो।

इसके साथ ही आपके अकाउंट की केवाईसी की प्रक्रिया भी पूरी होनी चाहिए। इसलिए पहले सारी औपचारिकताओं को पूरा कर लीजिए। यह काम भी बिना ईपीएफओ के दफ्तर ऑनलाइन हो सकते हैं। तो चलिए अब बिना कंपनी की मंजूरी के PF से रुपये निकालने की प्रक्रिया के बारे में भी जान लीजिए।

बिना कंपनी की मंजूरी के ऐसे निकालें PF से रुपये

  • आप नौकरी में रहते ही पीएफ अकाउंट से 90 प्रतिशत धन की निकासी कर सकते हैं। इसके लिए आपकी उम्र 54 साल होनी चाहिए।
  • कम सेवा करने वाले भी रुपये निकाल सकते हैं लेकिन इसकी सीमा थोड़ी कम है। अलग-अलग उम्र व सेवा के आधार पर अलग-अलग स्लैब बनाए गए हैं।
  • अगर आपने नौकरी छोड़ दी है और पीएफ अकाउंट में कई महीनों से रुपये नहीं जमा हो रहे हैं तो आप पूरी की पूरी रकम भी निकाल सकते हैं।
  • आपके पास दो ऑप्शन हैं। आप कंपनी में जाएं और पीएफ निकासी का फार्म भरें। अगर कंपनी आनाकानी कर रही है या आपको वहां जाने में कोई दिक्कत है तो आप ऑनलाइन प्रक्रिया को अपना सकते हैं।
  • इसके लिए आपको ईपीएफओ सदस्यों के लिए बनी ऑफिशियल वेबसाइट का विजिट करना होगा। वेबसाइट पर पहुंचने के लिए इस लिंक https://unifiedportal-mem.epfindia.gov.in/memberinterface/ पर क्लिक करें।
  • आप वेबसाइट पर पहुंच जाएंगे और आपको अब यूएएन व पासवर्ड के जरिए लॉग इन करना होगा। अगर आपने अब तक यूएएन नंबर प्राप्त किया है तो पहले इसको हासिल करें।
  • इसके लिए आपको कुछ खास नहीं करना होगा। यूएएन नंबर क्रिएट करने के लिए यहां पर क्लिक करें और दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें।
  • इसके बाद ही आप यूएएन के जरिए यूजर नेम व पासवर्ड क्रिएट करें।
  • जब यह काम हो जाए तो ईपीएफओ सदस्यों के लिए बनी वेबसाइट पर लॉग इन करें।
  • आपको मेन पेज पर ही केवाईसी का ऑप्शन नजर आएगा। अगर आपने अब तक केवाईसी नहीं करवाया है तो पहले यह प्रक्रिया कर लें।
  • केवाईसी के लिए आपको आधार कार्ड, पैन कार्ड व बैंक अकाउंट की डिटेल को भरना होगा। यह काम तभी होगा जब आपके पास यूनिवर्सल अकाउंट नंबर होगा।
  • आपने केवाईसी करवा रखा है तो सारी डिटेल्स को आधार से मैच कर लें। अगर कोई चीज मैच नहीं कर रही है तो इसमें सुधार करवाएं। यह काम यूएएन जेनरेट करने के तीन दिन के भीतर हो जाएगा।
  • अब आप ऑनलाइन सर्विसेज के सेक्शन में जाएं। यहां पर क्लिक करते ही आप ड्राप मैन्यू पर पहुंच जाएंगे।
  • ड्राप मैन्यू में आपको क्लेम फार्म का सेक्शन नजर आएगा। इसको क्लिक करें और फार्म नंबर 19 को चूज करें।
  • फार्म में अपनी सारी डिटेल को भरें। इसमें आप नाम, पता, पिता का नाम व कंपनी समेत सारी डिटेल को भर दें। यहां आपको नियुक्ति की तिथि व नौकरी छोड़ने की तिथि को भी भरना होगा।
  • अगर आप सेवा में हैं तो आंशिक निकासी के लिए दूसरे फार्म को भरना होगा।
  • यहां पर आप आई वांट टू अप्लाई फॉर ऑप्शन का चुनाव करें। इसमें फुल ईपीएफ सेटलमेंट व ईपीएफ पार्ट विड्राल ऑप्शन दिखेगा।
  • आपको फुल ईपीएफ सेटलमेंट के ऑप्शन को चुनना है। इसके बाद सबमिट का बटन दबा दें।
  • अगर एक भी कॉलम अधूरा होगा तो फार्म सबमिट नहीं हो पाएगा। इसलिए फार्म को दो बार चेक करें।
  • फार्म सबमिट होने के पांच से 10 दिन के बीच क्लेम को सेटेल कर दिया जाएगा। अगर किसी कारण से फार्म रिजेक्ट होता है तो आपको इसकी जानकारी ईपीएफओ द्वारा एसएमएस के माध्यम से दी जाएगी।
  • आप कमियों को दूर करके फिर से आवेदन कर सकते हैं। आपको ईपीएफओ के रिजनल ऑफिस की भी विजिट करनी पड़ सकती है।
  • रुपये जब आपके बैंक अकाउंट में पहुंच जाएंगे तो ईपीएफओ व बैंक द्वारा इसकी सूचना एसएमएस के माध्यम से दी जाएगी।

पीएफ कटौती का फार्मूला

  1. आपको पीएफ कटौती के नियमों के बारे में आज विस्तार से बताते हैं। आपको पता होगा कि वेतन से 12 प्रतिशत की कटौती कर इसे PF अकाउंट में हर महीने जमा किया जाता है।
  2. जितने रुपये आपकी तनख्वाह से काटे जाते हैं, उतने ही रुपये नियोक्ता यानि आपकी कंपनी भी पीएफ में अंशदान देती है। इस तरह से पीएफ अकाउंट में आपकी सैलरी का 24 प्रतिशत हिस्सा हर महीने जमा होता है।
  3. पीएफ अकाउंट में जमा होने वाली रकम पर टैक्स में छूट भी प्रदान की जाती है। फिलहाल पीएफ निकालने पर कोई टैक्स नहीं काटा जा रहा।
  4. हालांकि नए कर्मचारियों को इस तरह की सुविधा नहीं मिल पाती है। अब कंपनियां कॉस्ट टू कंपनी बेसिस पर लोगों को नौकरी देती हैं।
  5. कंपनियां अपने 12 प्रतिशत के अंशदान को भी कर्मचारी के वेतन में जोड़कर दिखाती हैं। यह तिगड़म पैकेज को आकर्षक बनाने के लिए की जाती है।
  6. कॉस्ट टू कंपनी यानि सीटीसी के आधार पर नौकरी पाने वाले कर्मचारियों की सैलरी से 24 प्रतिशत की कटौती कर रकम PF अकाउंट में जमा की जाती है।
  7. PF बेसिक सैलरी पर ही काटा जाता है। भत्तों से कटौती नहीं होती है। इसलिए कटौती को लेकर कर्मचारियों को थोड़ा कन्फ्यूजन हो सकता है। कर्मचारियों को लग सकता है कि 12 प्रतिशत की कटौती नहीं हो रही। आप सैलरी स्लैब को चेक करेंगे तो क्लीयर हो जाएगा।

पीएफ पर मिलने वाले ब्याज का गणित समझें

  • लो पेड कर्मचारी कभी पीएफ अकाउंट के पक्ष में नहीं रहते। उनकी कोशिश होती है कि भले ही उनको पेरोल पर न लिया जाए लेकिन पीएफ न काटा जाए। यह करके कर्मचारी खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारते हैं।
  • पीएफ अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज अन्य बचत योजनाओं की तुलना में काफी ज्यादा होता है। हाल फिलहाल में 8.65 प्रतिशत ब्याज पीएफ अकाउंट पर दिया जा रहा है जो अन्य योजनाओं की तुलना में सबसे ज्यादा है।
  • कम तनख्वाह पाने वाले कभी बचत नहीं कर पाते। पीएफ के नाम पर ही उनकी बचत शुरू हो जाती है। अगर पीएफ का ऑप्शन चुनने की आजादी कर्मचारियों को मिल गई तो वे बचत नहीं करेंगे। ऐसे में नौकरी जाने पर उनके हाथ एकदम खाली रहेंगे। विषम परिस्थितियों में पीएफ में जमा रकम ही काम आती है।
  • पीएफ पर 8.65 प्रतिशत का ब्याज मिलता है जबकि अन्य बचत योजनाओं पर सात प्रतिशत या इससे भी कम ब्याज प्रदान किया जा रहा है। अब तो एफडी पर भी सात प्रतिशत या इससे कम ब्याज दिया जा रहा है।
  • कर्मचारी के पीएफ अकाउंट में कंपनियां भी 12 प्रतिशत का योगदान देती हैं। यानि पीएफ आपके वेतन से 12 प्रतिशत काटा जाता है लेकिन जमा होता है 24 प्रतिशत।
  • नियोक्ता के शेयर से 3.67 प्रतिशत राशि कर्मचारी के पीएफ अकाउंट में जमा की जाती है। नियोक्ता के अंशदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा ईपीएस यानि इंप्लाई पेंशन स्कीम में जमा किया जाता है। जब कर्मचारी 58 वर्ष का होने के बाद रिटायर होता है तो उसको ईपीएस से पेंशन प्रदान की जाती है।
  • अगर कर्मचारी नौकरी बीच में छोड़ देता है तो उसको पेंशन की रकम भी लौटा दी जाती है। एक निश्चित अवधि तक सेवा में रहने वाले कर्मचारी पेंशन के हकदार बनते हैं। जब तक वे इसे नहीं निकालते, उनको ब्याज मिलता रहता है। पेंशन मद में जमा किए जाने वाले रुपये कर्मचारी के 58 साल का होने तक लॉक रहते हैं।

About Ashutosh Srivastava

हिंदी पत्रकारिता में 21 वर्ष का अनुभव। दैनिक जागरण और अमर उजाला में लंबा समय दिया।

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