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पैन कार्ड | Pan card in hindi

पैन कार्ड एक यूनिक पहचान पत्र है। भारत में यह आमतौर पर उन लोगों को जारी किया जाता है, जो नियमित रूप से करदाता हैं। रिटर्न फाइल करने के लिए भी पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है। कार्ड में एक यूनिक नंबर भी होता है। यह एक कंप्यूटर आधारित सिस्टम है, जिसके तहत लोगों को एक दस डिजिट का स्पेशल नंबर जारी किया जाता है।

इस प्रक्रिया के तहत करदाताओं से जुड़ी सभी तरह की जानकारियां जुटाई जा सकती हैं। इसे पूरे भारत में शेयर किया जा सकता है। यही वजह है कि एक पैन नंबर पर दो लोग एक साथ टैक्स जमा नहीं कर सकते। क्योंकि जैसे ही उनका पैन नंबर कंप्यूटर में फीड किया जाएगा, उनसे जुड़ी सभी जानकारियां सामने आ जाएंगी। पैन का फुल फार्म पर्मानेंट अकाउंट नंबर है।

पैन कार्ड क्या है? | What is pan card ?

गौरतलब है कि यह अमेरिका में एसएसएन कार्ड की नकल है। अमेरिका में सभी को यह कार्ड जारी किया जाता है। यह एक नाइन डिजिट स्पेशल नंबर है, जिसे सुरक्षा की दृष्टि से जारी किया जाता है। इसे शुरुआती दौर में टैक्सेशन नंबर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। वहीं पैन की खास बात यह है कि आप इसे पूरी जिंदगी यूज कर सकते हैं। यानी अगर एक बार पैन कार्ड जारी हो गया तो इसे कभी बलदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पैन कार्ड नई डिजाइन में | Pan card in new design

आयकर विभाग ने पैन कार्ड को नए फार्मेट पर जारी करने का निर्देश दिया था, जिसपर अमल करते हुए 1 जनवरी 2017 से नए और यूनिक पैन कार्ड जारी किए जाने लगे हैं। नए कार्ड में क्विक रिस्पांस यानी क्यूआर कोड प्रिंट है। इस कोड को डाटा वैरिफिकेशन के लिए यूज किया जा सकता है। खास बात यह है कि नए कार्ड में पिता के नाम को भी जोड़ा गया है।

पैन कार्ड का इतिहास | History of Pan card

शुरुआत में पैन कार्ड को मैनुअल सिस्टम के आधार पर जारी किया जाता था। उसमें एक जीआर नंबर होता था। करदाता इसी नंबर को यूज करते थे। यही वजह है कि मैनुअल सिस्टम आधारित नंबर को भारत में यूनिक नंबर नहीं माना जाता था। हालांकि भारत सरकार ने 1972 में इस सिस्टम को लागू कर दिया।

इसके अलावा 1976 में पैन को आर्टिकल 139-ए और इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत सभी करदाताओं के लिए अनिवार्य कर दिया गया। सरकार ने इसमें एक और सुधार करते हुए 1995 में मैनुअली सिस्टम को खत्म कर दिया। बावजूद इसके पैन कार्ड में कुछ दिक्कते थीं।

  • कोई ऐसा डेटाबेस नहीं था, जिससे रिकार्ड को मिनटेन किया जा सके। पैन नंबर के आधार पर थोड़ी-बहुत जानकारियां ही जुटाई जा सकती थीं।
  • ऐसी कोई केंद्रीय अथारिटी नहीं थी, जो इसकी जांच कर सके कि एक ही नंबर पर दो कार्ड तो जारी नहीं किए गए।
  • इसके अलावा यह एक तरह का पर्मानेंट कार्ड नहीं था। घर का पता बदलने पर कार्ड को भी चेंज करना पड़ता था।

कैसे करें आवेदन | How to apply Form

  1. पैन कार्ड बनवाना भी आसान हो गया है। आप कार्ड के लिए एनएसडीएल की वेबसाइट पर अप्लाई कर सकते हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर कई एजेंसियों को यह काम सौंपा गया है, जो लोगों के लिए पैन कार्ड बनाने का काम कर रही हैं। करेक्शन के लिए भी इसी प्रक्रिया से गुजरना होगा। आप डुप्लीकेट पैन कार्ड भी हासिल कर सकते हैं। अगर कार्ड खो गया है या फिर चारी हो गया तो स्थानीय एजेंसियों से संपर्क कर डुप्लीकेट कार्ड हासिल किया जा सकता है।
  2. खास बात यह है कि एनआरआई यानी ऐसे लोग जो भारत के मूल निवासी तो हैं, लेकिन विदेशों में रह रहे हैं, वे भी पैन कार्ड हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा विदेशी नागरिक, जो भारत में वैध तरीके से रह रहे हैं, वे कार्ड को हासिल कर सकते हैं। उन्हें भी उसी प्रक्रिया के तहत कार्ड एलॉट किया जाएगा, जिसके तहत आम भारतीयों को जारी किया जाता है।
  3. पैन कार्ड को एनएसडीएल यानी नेशनल सिक्योरिटी डिपासिटरी लिमिटेड पर तो अप्लाई किया जा सकता ही है, इसके अलावा इसे हासिल करने के लिए आप यूटीआईएसएल यानी इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी एंड सर्विस लिमिटेड की सेवा भी ली जा सकती है। यानी आप ऑफलाइन और आनलाइन दोनों तरह से पैन कार्ड बनवा सकते हैं।

ऑनलाइन प्रक्रिया | Online system

  • ऑनलाइन पैन कार्ड बनवाने के लिए nsdl और utiisl की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। यहां आपको न्यू पैन ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।
  • भारतीयों को 49-ए को सिलेक्ट करना है, जिसमें एनआरआई, एनआरई, ओसीआई भी शामिल हैं।
  • ऑनलाइन फार्म में अपना नाम, घर का पता, जन्मतिथि, जेंडर, टेलीफोन नंबर, इनकम डिटेल्स आदि का जिक्र करना होगा।
  • फार्म भरने के बाद प्रोसेसिंग फीस भी देना होगा।
  • पासपोर्ट साइज फोटो, पहचान पत्र के साथ ही सभी तरह के जरूरी दस्तावेजों के साथ डिमांड ड्राफ्ट बनवाइए। अगर आप डीडी के जरिए फीस जमा कर रहे हैं।
  • प्रक्रिया पूरी होने के बाद फार्म को एनएसडीएल आफिस भेजा जाएगा।
  • पैन कर्ड पंद्रह दिन के अंदर आपके पते पर पहुंच जाएगा।

कैसे करें ऑफलाइन आवेदन | How to apply offline Form

  1. कार्ड के लिए आप ऑनलाइन के साथ ही ऑफलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। इसके लिए एनएसडीएल और यूटीआईआईएसएल की वेबसाइट से फार्म को डाउनलोड किया जा सकता है। दूसरी तरफ आप यूटीआईआईएसएल एजेंट से भी फार्म हासिल कर सकते हैं।
  2. फार्म भरने के बाद इससे जुड़े हुए जरूरी दस्तावेजों को अटैच करें।
  3. फार्म को एनएसडीएल के आफिस में सबमिट करें।
  4. फार्म सबमिट होने के पंद्रह दिन के अंदर पैन कार्ड आपके पते पर पहुंच जाएगा।

पैन कार्ड खो गया तो क्या करें | What can do if Pan card lost

मुमकिन है कि आपका पैन कार्ड चोरी हो जाए या फिर पर्स कहीं गुम हो गया हो, जिसमें पैनकार्ड रखा था। ऐसी कंडीशन में डुप्लीकेट फार्म हासिल किया जा सकता है। ऐसा इसलिए ताकि करदाता सही समय पर टैक्स जमा कर सकें। इसके अलावा वे लोग जिन्हें रिटर्न दाखिल करना है और उनका कार्ड कहीं खो गया है तो वे भी डुप्लीकेट पैन कार्ड हासिल कर सकते हैं। हम आपको बता रहे हैं कि आप किस प्रक्रिया को पूरा कर डुप्लीकेट कार्ड हासिल कर सकते हैं।

  • अगर आप चाहते हैं कि ऑनलाइन डुप्लीकेट पैन कार्ड बन जाए तो आपको एनएसडीएल के वेब पोर्टल पर विजिट करना होगा। आपको यहां पैन चेंज रिक्वेस्ट ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। इसके बाद पूरी डिटेल्स भरना होगा।
  • अगर आप चाहते हैं कि डुप्लीकेट कार्ड की बजाय एक ऐसा कार्ड मिले, जिसमें आपका पैन नंबर वही हो तो उन्हें बाईं तरफ दिए गए किसी बॉक्स को सिलेक्ट करने की जरूरत नहीं है।
  • पैन कार्ड में कोई चेंज न होने की सूरत में घर के पते को अपडेट किया जाएगा।
  • इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद जरूरी दस्तावेजों को फार्म के साथ सबमिट करना होगा, जिसमें आधार नंबर, फोटो, पहचान पत्र आदि शामिल हैं।
  • इसके लिए नाममात्र फीस लिया जा रहा है। अगर आप क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए आनलाइन पेमेंट करते हैं।

कार्ड के लिए जरूरी दस्तावेज | Necessary document for card

पैन कार्ड के लिए जरूरी दस्तावेज अटैन करने ही होंगे। अगर ऐसा नहीं किया तो आवेदन रद्द हो सकता है। इसकी वजह से आपको दोबारा अप्लाई करना होगा। हालांकि पैन कार्ड के लिए बेसिक दस्तावेज ही मांग जाते हैं। इसमें एडरेस प्रूफ और पहचान पत्र ही मुख्य रूप से मांगे जाते हैं।

इसके बाद फार्म में घर का पता, नाम, पिता का नाम आदि चीजों का जिक्र करना होता है। खास बात यह है कि आप जो भी दस्तावेज लगा रहे हैं, एनएसडीएल उन्हें अपने डेटाबेस के जरिए वैरिफाई करता है। अगर वैरिफिकेशन में कोई गड़बड़ी मिली तो आपका आवेदन रद्द भी हो सकता है।

  • पैन कार्ड के फार्म दो तरह के होते हैं
  • फार्म 49-ए उन लोगों के लिए है, जो मूल रूप से भारतीय हैं। वह चाहे भारत में रह रहे हों या फिर विदेशों में। वे इस आर्टिकल के जरिए आवेदन कर सकते हैं
  • फार्म 49-ए उन लोगों के लिए भी जरूरी है, जो कंपनी, फार्म, एनजीओ, लोकल बॉडीज, ट्रस्ट से जुड़े हैं
  • वहीं फार्म 49-एए, उनके लिए हैं, जो विदेशी तो हैं, लेकिन टैक्स भारत में दे रहे हैं। लिमिटेड कंपनी, फर्म, ट्रस्ट, एसोसिएशन आदि से जुड़े हैं। ओसीआई यानी ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया, एनआरआई भी इसी फार्म के जरिए पैन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं
  • इस तरह के जो लोग भी पैन कार्ड के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें भी दस्तावेज के रूप में पासपोर्ट की कॉपी, पीआईओ कार्ड, बैंक अकाउंट स्टेटमेंट, एडरेस और आईडेंटिटी प्रूफ लगाना होगा

कौन जारी करता है कार्ड | Who issue Pan card

अगर आपने पैन कार्ड के लिए आवेदन कर दिया है। वैरिफिकेशन के दौरान फार्म के साथ अटैच सभी तरह के दस्तावेज सही पाए गए तो कार्ड जारी हो जाएगा। कार्ड जारी करने की अथारिटी मुख्य रूप से एनएसडीएल के पास है। जिन लोगों ने ऑनलाइन या जिला स्तरयी एजेंसी के जरिए फार्म भरा है, उन्हें भी एनएसडीएल ही कार्ड जारी करेगी। लोग इसी साइट पर जाकर अप्लाई भी कर सकते हैं

किस अक्षर के क्या मायने हैं | What meaning of letters

पैन कार्ड पर जो यूनिक नंबर लिखा होता है, उसकी शुरुआत किसी ने किसी अक्षर के साथ होती है, जैसे ए, बी, जी, पी आदि। हम आपको बता रहे हैं कि अंग्रेजी में किस अक्षर के क्या मायने हैं और किस कैटिगिरी के लोगों के साथ कौन सा अक्षर अटैच किया जाता है।

  • एसोसिएशन ऑफ परसंस
  • बॉडी ऑफ इंडिविजुअल
  • कंपनी
  • फर्म
  • गवर्नमेंट
  • हफ यानी हिंदू अनडिवाइडेट फैमिली
  • लोकल अथारिटी
  • जूडिशियल परसंस
  • इंडिविजुअल टैक्स पेयर
  • ट्रस्ट
  • कृष

पैन कार्ड के प्रकार | Types of Pan card

पैन कार्ड कई तरह के होते हैं। आयकर विभाग ने सभी तरह के टैक्स पेयर कंपनी और इंडिविजुअली कर देने वालों के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया है। यही वजह है कि अलग-अलग लोगों और कंपनियों को ध्यान में रखकर ही कई तरह के कार्ड भी बनाए जा रहे हैं।

पैन कार्ड फॉर इंडिविजुअल | Pan card for individual

इंडिविजुअल पैन कार्ड के जरिए उन्हें फाइनेंशियल ट्राजैंक्शन लिंक कर दिया जाता है। आईटी डिपार्टमेंट्स इसके जरिए टैक्स से जुड़े सभी तरह के डाटा एकत्रित कर सकता है

ओल्ड पैन सीरीज | Old Pan card series

पैन कार्ड की पहली सीरीज 1972 में लांच हुई थी। उस समय कम लोगों को कंडीशन अप्लाई नियम के साथ ही पैन कार्ड जारी किए जाते थे। वह पूरी तरह से मैनुअली स्ट्रक्चर आधारित था, जिसकी अपनी कोई यूनिक पहचान नहीं थी। उसका डेटाबेस भी मिंटेन नहीं था। इसके अलावा उनके पास कोई पर्मोमेंट नंबर भी नहीं था। यही वजह है कि पुरानी व्यवस्था को खत्म करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई।

पैन कार्ड की नई सीरीज | New series of Pan card

पुरानी व्यवस्था को खत्म करने के लिए नई व्यवस्था शुरू की गई, जो पूरी तरह से कंप्यूटर सिस्टम बेस्ड थी। यह व्यवस्था 1995 को लागू की गई। कार्ड की नई सीरीज आने के बाद लोगों के पास अपना एक यूनिक नंबर होता ही था। आर्टिकल 139-ए के तहत पैन कार्ड की नई सीरीज को आयकर विभाग ने भी मंजूरी दे दी।

पैन कार्ड क्यों जरूरी है | Why pan card must

पैन कार्ड एक तरह का दस्तावेज है, जिसके बगैर कोई टैक्स जमा नहीं कर सकता। इसके टैक्स जमा करने के लिए जरूरी किया ही गया है, रिफंड हासिल करने के लिए भी पैन कार्ड ही मांगे जाते हैं। यह कार्ड आईडेंटिटी प्रूफ के लिए भी काम आता है। इसका यूनिक नंबर बैंकों में तो काम आता ही है, दूसरे तमाम जगहों पर लेनदेन करने के लिए भी इसकी जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि पैनकार्ड को अनिवार्य किया गया है। इसके क्या फायदे हैं और ये कहां यूज हो रहा है।

  • पैनकार्ड डायरेक्ट टैक्स अदा करने के लिए जरूरी है
  • फर्म और कंपनी रजिस्ट्रेशन के लिए भी पैन की जरूरत पड़ती है
  • फोरव्हीलर और टू व्हीलर को खरीदने और बेचने के लिए भी पैन कार्ड की जरूरत पड़ती है। होटल आदि जगहों पर 25 हजार से ज्यादा का पेमेंट करने के लिए भी कार्ड मांगे जाते हैं
  • बैंकों में 50 हजार से ज्यादा के लेनदेन पर भी पैन कार्ड मांगे जाते हैं
  • किसी भी तरह की म्यूचुअल फंड स्कीम के लिए भी कार्ड की जरूरत पड़ती है
  • पचास हजार से ज्यादा के शेयर खरीदने पर भी कार्ड का यूनिक नंबर बताना होता है
  • पचास हजार से ज्यादा की बीमा पॉलिसी के लिए भी आपको पैन कार्ड दिखाना होगा

About Mohd. razi

हिंदी पत्रकारिता में 14 वर्ष का अनुभव। दैनिक जागरण और अमर उजाला में काफी वक्त दिया।

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