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पैन कार्ड : रिफंड के लिए कैसे करें अप्लाई | pan card : how to apply for refund in hindi

यह पूरी तरह से इलेक्ट्रानिक दौर है। हर जेब में मोबाइल है और हर घर में कंप्यूटर या फिर लैपटॉप है। इंटरनेट के इस युग में अगर आप पिछड़ गए तो काफी पीछे चले जाएंगे। यही वजह है कि हर चीज डिजिटल हो रही है। केंद्र हो या फिर प्रदेश दोनों सरकारों की ज्यादातर स्कीम ऑनलाइन होती जा रही है।

जो फिलहाल ऑफलाइन हैं, वे जल्द ही आनलाइन हो जाएंगी। सरकारें इस बात पर जोर दे रही हैं कि लोग पूरी तरह से डिजिटल हो जाएं, ताकि उन्हें अपने किसी भी काम के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़े। ऐसे में जरूरी है कि आप अगर पैन कार्ड बनवाने जा रहे हैं तो आपको पता चाहिए कि यह घर बैठे ही बन जाएगा।

बस आपको थोड़ा नेट फ्रेंडली होना पड़ेगा। दूसरी तमाम चीजों की तरह से पैन कार्ड भी ऑनलाइन बनवा सकते हैं। सरकार ने इसके लिए दो बड़ी वेबसाइट लांच की है, जो लोगों का पैन कार्ड बनाने का काम कर रही हैं। एक वेबसाइट का नाम है एनएसडीएल और दूसरी वेबसाइट का नाम है यूटीआईआईटीएसएल।

दोनों वेबसाइट पर विजिट कर आप पैन कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं। दोनों वेबसाइट पर आपको पैन कार्ड से जुड़ी तमाम जानकारियां भी मिल जाएंगी। नया पैन कार्ड बनवाना हो या पैन कार्ड खोने पर डुप्लीकेट पैन कार्ड के लिए फिर से अप्लाई करना हो। पुराने पैन नंबर के लिए भी आप इन दोनों वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। हम आपको बता रहे हैं कि दोनों वेबसाइट किस तरह की जानकारियां आपको दे रही हैं और आप यहां विजिट कर किस तरह पैन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

स्टेटस ऑफ टैक्स रिफंड | status of tax refund

करदाता आयकर विभाग की आफीशियल वेबसाइट पर विजिट कर अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं। वे जैसे ही अपना पैन नंबर डालेंगे, उनके सामने इसी साल का रिफंड स्टेटस भी सामने आ जाएगा। यहां उन्हें यह भी पता चल जाएगा कि वे कितना रिफंड हासिल कर सकते हैं। रिफंड से जुड़ी दूसरी तमाम जानकारियां भी हासिल की जा सकती हैं।

पैन कार्ड, क्या है टिन सिस्टम | what is tin system

टिन सिस्टम को इलेक्ट्रानिक रिटर्न स्वीकार करने के लिए बनाया गया है। टिन सिस्टम को इसलिए डेवलप किया गया है, ताकि करदाताओं को आयकर विभाग के दफ्तर के चक्कर ज्यादा न काटने पड़े। यह सिस्टम लोगों को तमाम तरह की सुविधाएं प्रदान करता है। इसके जरिए टैक्स से जुड़े तमाम पहलुओं को आसानी से समझा जा सकता है। टिन सिस्टम को इरैक्स और ओलटास को चेक करने के लिए भी डेवलप किया गया है। ओलटास के जरिए आयकर विभाग देशभर के करदाताओं से जुड़ी जानकारियां हासिल कर सकता है। जबकि इरैक्स के जरिए सालाना सूचना रिपोर्ट, टीडीएस और टीसीएस से जुड़ी जानकारियां करदाताओं को भेजी जाती हैं।

  • टैन– टैक्स डिडक्शन और अकाउंट नंबर कलेक्शन के लिए है, या फिर इसके जरिए करदाताओं द्वारा रिटर्न, टीडीएस और टीसीएस फाइल करने के लिए किया जाता है।
  • पैन– पैन का मतलब है पर्मानेंट अकाउंट नंबर है। इसे सभी तरह के करदाताओं के जिए जरूरी किया गया है। टीडीएस, टीसीएस और रिटर्न फाइल करने के लिए भी पैन नंबर की जरूरत पड़ेगी। बगैर पैन नंबर के आप कुछ भी फाइल नहीं कर सकते हैं। एनएसडीएल की वेबसाइट पर सब कुछ दिया गया है। आप यहां क्लिक कर एप्लीकेशन स्टेटस भी चेक कर सकते हैं। इसके अलावा पैन के लिए आवेदन तो कर ही सकते हैं, करेक्शन के लिए भी आप इसी वेबसाइट की मदद ले सकते हैं।
  • ई-टीडीएस-टीसीएस– आमतौर पर लोग टीडीएस और टैक्स जमा करने के लिए लोकल एजेंसियों का सहारा लेते हैं। टिन-एनएसडीएल वेबसाइट आपकी तमाम तरह की समस्याओं को एक पल में खत्म कर देगी। यह आपको एक ऑनलाइन प्लेटफार्म मुहैया कराएगी, जहां आकर आप सारी चीजों के बारे में जान सकेंगे।
  • एआईआर- एआईआर का मतलब एनुअल इनफार्मेशन रिटर्न है। एआईआर दाखिल करने के लिए भी आप एनएसडीएल का प्रयोग कर सकते हैं। यहां आपको रजिस्ट्रेशन, स्टेटस ट्रैकिंग, चेंज फॉर डिजिटल सिग्नेचर आदि चीजों के बारे में भी जानकारी मिल जाएगी।
  • एआईएन– एआईएन का मतलब अकाउंट आफिस आईडेंटिफिकेशन नंबर है। आप एआईएन के लिए आनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। एनएसडीएल पर इसके बार में भी दिया गया है। यहां आप फार्म 24-जी को भी डाउनलोड कर सकते हैं। साथ ही बुक आईडेंटिफिकेशन नंबर यानी बिन के लिए भी इस वेबसाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पैन कार्ड और यूनिक नंबर | pan card and unique number

पैन कार्ड बनवाना तो आसान हो ही गया है, पैन नंबर के जरिए आदमी के बारे में जरूरी जानकारियां भी जुटाई जा सकती हैं। पैन नंबर के जरिए आयकर विभाग करदाताओं के बारे में एक क्लिक के बारे में सारी जानकारियां जुटा लेता है। बैंक और बीमा दफ्तरों में भी पैन नंबर के जरिए खाताधारकों के बारे में सबकुछ पता किया जा सकता है।

खास बात यह है कि बैंक ने पचास हजार से ज्यादा के लेनदेन पर पैन नंबर को जरूरी कर दिया गया है। इसकी वजह है कि पैन नंबर एक यूनिक नंबर है और इससे यह पता लगाया जा सकता है कि पैसा जमा करने वाला कौन है। उसके कितने बैंक में कितने अकाउंट हैं। आयकर विभाग भी करतदाओं से जुड़े रिटर्न, टीडीएस आदि के बारे में आसानी से जानकारियंा जुटा सकता है।

फर्जी पैन नंबर भी जारी | issued fake pan numbers

ऐसा नही है कि सभी पैन नंबर पूरी तरह से सही है। कई ऐसी एजेंसियां भी हैं, जो लोगों के लिए फर्जी पैन कार्ड भी बना रहे हैं। लोगों को इसके बार में उस वक्त पता चलता है जब वह किसी सरकार विभाग में इस फिल करते हैं। गौरतलब है कि देशभर में ऐसे 11 लाख पैन कार्ड को निरस्त किया गया है, जो फर्जी तरीके से बनाया गया था।

यही वजह है कि सरकार ने साफ कर दिया कि पैन कार्ड बनवाने के लिए एनएसडीएल और यूटीआई की वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें। अगर ऑफलाइन पैन कार्ड बनवाना है तो भी यूटीआईआईटीएसएल के आफिस में जाकर फार्म भरें।

एयरलाइंस में भी पैन नंबर जरूरी | pan required in airlines

बैेंकों में नया खाता खोलने और पचास हजार रुपये से ज्यादा का लेनदेन करने पर पैन नंबर मांगा जाता हैं। इसी तरह बीमा में नई पॉलिसी के लिए तो पैन नंबर की डिमांड की ही जाती है, पॉलिसी पूरी होने पर उसकी रकम हासिल करने के लिए भी पैन नंबर मांगे जाने लगे हैं। खास बात यह है कि अब ट्रेनों में भी आईडीपू्रफ के तौर पर पैन कार्ड मांगा जा रहा है।

यही वजह है कि बहुत से लोग, जिनके पास आधार कार्ड नहीं है, वे पैन नंबर साथ लेकर चलते हैं, ताकि उन्हें किसी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इसी तरह एयरलाइंस में भी पैन नंबर मांगे जा रहे हैं। जो लोग टिकट बुकिंग कराते हैं पहले तो उनसे आधार नंबर की मांग की जाती है। अगर उनके पास आधार कार्ड नहीं है तो पैन नंबर देने को कहा जाता है। जिनके पास पैन नंबर होता है, उन्हें ही टिकट भी दिए जा रहे हैं।

यूटीआईआईटीएसएल के बारे में भी जानें | know about utiitsl

यूटीआईआईटीएसएल भारत की सबसे बड़ी वित्तीय सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी है। इसे 1993 में बनाया गया था। इसे अंडर सेक्शन 2-45 ऑफ द कंपनी एक्ट 2013 के तहत अमल में लाया गया था। यह लोगों को तकनीकी और आउटसोर्सिंस सर्विस मुहैया कराती है। फाइनेंशियल और गवर्नमेंट सेक्टर दोनों के लिए यह मुफीद है।

आप इसकी वेबसाइट पर आकर सभी तरह की जानकारियां हासिल कर सकते हैं। कंपनी के चार क्षेत्रीय कार्यालय है और देशभर में 75 शाखाएं हैं। करदाता भी इस वेबसाइट का इस्तेमाल कर आयकर विभाग से जुड़ी तमाम जानकारियां हासिल कर सकते हैं। आयकर विभाग ने पैन कार्ड के लिए यूटीआईआईटीएसलए का गठन करने के लिए निर्देश दिया था, जिसके बाद इसे अमल में लाया गया। पैन कार्ड के लिए आवेदन से लेकर डिलिवर तक के लिए यूटीआई का इस्तेमाल किया जा सकता है।

ऑफलाइन सर्विस भी ले सकते हैं | can take offline service too

एनएसडीएल की वेबसाइट आपको ऑफलाइन सर्विस भी मुहैया कराती है। यानी टीडीएस, टीसीएस, रिटर्न आदि जिन चीजों के लिए आप ऑनलाइन फाइल करते हैं, उन्हीं चीजों के ऑफलाइन यूज के लिए भी इस वेबसाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

ई-गवर्नेंस और एनएसडीएल l e-governance and nsdl

सरकारी विभाग के लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर सभी तरह के जरूरी कामों को ऑनलाइन निपटा रहे हैं। यही वजह है कि सरकार से लेकर प्राइवेट लोगों की तमाम स्कीमें धीरे-धीरे ऑनलाइन होती जा रही हैं। इसको और आसानी बनाने के लिए सरकार ने 1995 में एनएसडीएल वेबसाइट बनाया। तमाम राष्ट्रीयकृत और निजी बैंक भी इस वेबसाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

शेयर होल्डर्स एसबीआई, एसडीएफसी, एक्सिस, औरियंटल, यूनियन बैंक, देना, कैनरा, स्टैंडर्ड चार्टेंड आदि बैंक के जरिए अपने काम को और आसान बना रहे हैं। खास बात यह है कि तमाम तरह की सरकारी और निजी एजेंसी भी एनएसडीएल के वेबसाइट पर जाकर पैन कार्ड फारमेशन से लेकर टैक्स और शेयर से जुड़े अपने काम कर रही हैं।

About Ashutosh Srivastava

हिंदी पत्रकारिता में 21 वर्ष का अनुभव। दैनिक जागरण और अमर उजाला में लंबा समय दिया।

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