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पीएसके के बारे में जानें | know about psk in hindi

passport sewa kendra
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भारत सरकार की ओर से पासपोर्ट जारी किया जाता है। पासपोर्ट उन लोगों के लिए जारी किया जाता है, जो मूल रूप से भारतीय हैं। पासपोर्ट नागरिकता कार्ड भी है। पासपोर्ट एक्ट 1967 के तहत जारी होने वाले पासपोर्ट के आधार पर ही लोग विदेशों का दौरा कर सकते हैं। खास बात यह है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को उसी देश में भी पासपोर्ट जारी करने की व्यवस्था है। भारत सरकार ने इसके लिए 162 से ज्यादा देशों में डिपलोमेटिक मिशन के तहत पासपोर्ट बनाने की छूट दी है।

पासपोर्ट हाई कमीशन और एंबेसी के मुताबिक ही जारी किया जाएगा। इसके अलावा भारत में 37 से ज्यादा जगह हैं, जहां पासपोर्ट बनाया जाता है। इसके बाद अलग-अलग जगहों से डिमांड के हिसाब से पासपोर्ट जारी कर दिया जाता है। पासपोर्ट जारी करने का काम पासपोर्ट सेवा केंद्र की ओर से किया जाता है।

एक बार अप्वाइंटमेंट हो गया तो फिर आपको साक्षात्कार के लिए पासपोर्ट सेवा केंद्र (Psk) जाना पड़ेगा। साक्षात्कार के बाद आवेदन को आगे बढ़ाया जाता है। पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया होती है और इसके बाद पासपोर्ट को पहले तो प्रिंटिंग में भेजा जाता है। प्रिंटिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पासपोर्ट को संबंधित व्यक्ति के पते पर भेज दिया जाता है। हम आपको बता रहे हैं कि पीएसके क्या है और यह किस तरह काम करता है।

पीएसके

  1. अप्वाइंटमेंट मिलने के बाद एआरएन रसीद के साथ समय पर पासपोर्ट सेवा केंद्र पहुंचे
  2. आपने फार्म के साथ जो भी दस्तावेज लगाए हैं, सबसे पहले उनकी जांच की जाएगी
  3. आपको कमरे में बैच नंबर के साथ बुलाया जाएगा। कमरे में जाते समय आपकी भी जांच होगी
  4. एक बार अंदर चले गए तो आपको एक टोकन नंबर दिया जाएगा। इसके बाद आपके वेटिंग रूप में इंतजार करना पड़ेगा, जब तक आपको टोकन नंबर के साथ बुलाया न जाए
  5. इसके बाद आपका नंबर स्क्रीन पर दिखाया जाएगा
  6. अंदर जाने के बाद आपको कई तरह के काउंटर नजर आएंगे
  • काउंटर ए  सिटीजन सर्विस एक्सक्यूटिव और पर्सनल कैरीज आउट डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन, फीस कलेक्शन और फोटोग्राफी सेंटर नजर आएंगे
  • काउंटर बी यहां वेरिफिकेशन ऑफिसर बैठते हैं, जो आपके दस्तावेजों की जांच करते हैं
  • काउंटर सी यहां ग्रांटिंग आफिसर बैठते हैं, जो आपके पूरे फार्म की जांच करते हैं

कैसे होती है जांच | How is the investigation

साक्षात्कार खत्म होने के बाद प्री पुलिस वेरिफिकेशन शुरू हो जताी है। यह उस वक्त होता है, जब कोई नए पासपोर्ट के लिए आवेदन करता है। आवेदक की ओर से फार्म जमा होने के बाद उसे पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में डाल दिया जाता है। पासपोर्ट सेवा केंद्र की ओर से इसकी जानकारी संबंधित थाने को भेज दी जाती है।

रिपोर्ट पहले एसएसपी आफिस और फिर थाने मे दी जाती है। फार्म की कॉपी थानों में पहुंचने के बाद दो सिपाही इसके लिए तैनात कर दिए जाते हैं। सिपाही पहले तो संबंधित मुहल्ले में जाकर उस विशेष व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाते हैं। पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र से लेकर घर के पते और शिक्षा तक के बारे में जानकारी हासिल की जाती है।

अगर व्यक्ति पासपोर्ट फार्म पर कोई पसर्नल चीजों का जिक्र किया जाता है तो उसके बारे में भी जानकारी जुटाई जाती है। इसके अलावा पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वालों की छवि इलाके में कैसी है, इसे भी चेक किया जाता है। पुलिस रिकार्ड में उसके खिलाफ कोई मुकदमा तो नहीं है।

प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस की तरफ से पासपोर्ट आफिस को नो आपत्ति प्रमाणपत्र भेज दिया जाता है। खास बात यह है कि बच्चों के लिए अगर पासपोर्ट बनवाया जा रहा है तो उसके लिए किसी भी तरह की पुलिस वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती। पासपोर्ट सेवा केंद्र की ओर से सीधे पासपोर्ट को प्रिंटिंग के लिए भेज दिया जाता है।

दस्तावेजों की होती है जांच | documents is verified

आपने फार्म के साथ जिन दस्तावजों को अटैच किया जाता है, उनकी जांच भी की जाती है। थानों दो पुलिस सिपाहियों को इसकी जांच सौंपी जाती है, वे मैनुअली तौर पर इस काम को अंजाम देते हैं। बावजूद इसके हर थानों में ऐसे दो सिपाही होते हैं, जिन्हें कंप्यूटर फ्रेंडली बनाया जाता है।

पासपोर्ट आवेदक की ओर से फार्म के साथ जो भी दस्तावेज अटैच किए जाते हैं, उन्हें ऑनलाइन वेरिफाई करने का काम किया जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर आवेदक की ओर से पासपोर्ट फार्म पर हाईस्कूल या इंटरमीडिएट की मार्कशीट की फोटो कॉपी अटैच की गई है तो उसकी ऑनलाइन जांच की जाती है।

सिपाही उस दस्तावेज को संबंधित बोर्ड आफिस को भेजते हैं। उसके रोल नंबर के जरिए मार्कशीट की असलियत का पता लगाया जाता है। अगर वेरिफिकेशन में सारे प्रमाणपत्र सही पाए गए तो पासपोर्ट सेवा केंद्र को एनओसी भेज दी जाती है।

जांच से पहले जारी होता है पासपोर्ट | passport issues before investigation

सरकार का मकसद लोगों को जल्द से जल्द और कम समय में पासपोर्ट मुहैया कराना है। इसके लिए ऑनलाइन प्रक्रिया भी शुरू की गई है, ताकि लोग इस प्रक्रिया से गुजरकर पासपोर्ट के लिए सीधे आवेदन कर सकें। चूंकि भारत सरकार की ओर से अरजेंट पासपोर्ट जारी करने की व्यवस्था भी है, इसलिए इस दौरान प्री पुलिस वेरिफिकेशन होने की संभावना नहीं रहती है।

सरकार चाहती है कि लोग पुलिस वेरिफिकेशन के चक्कर में फंसकर अपनी विजिट छोड़ सकते हैं। यही वजह है कि सरकार ऐसे मामलों में पासपोर्ट जारी होने के बाद पुलिस वेरिफिकेशन कराती है। आवेदक की ओर से जो भी दस्तावेज जमा कराए गए हैं, उनकी जांच तो होती ही है, यह भी देखा जाता है कि उसका कोई आपराधिक रिकार्ड तो नहीं है। पासपोर्ट जारी होने के बाद शुरू की गई पुलिस वेरिफिकेशन में अगर रिपोर्ट नकारात्मक पाई गई तो उस व्यक्ति का पासपोर्ट रद भी हो सकताा है।

बच्चों को जांच में छूट | children get rebate for investigation

कुछ ऐसे भी मामले होते हैं, जिनमें पुलिस वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं होती है। चाहे वह फ्रेश पासपोर्ट का ही मामला क्यों न हो। अगर डिपलोमेटिक श्रेणी में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया है तो फिर इस मामले में पुलिस वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती है। इसी तरह अगर आफीशियल श्रेणी में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया है तो फि इस मामले में भी पुलिस वेरिफिकेशन की कोई जरूरत नहीं पड़ती है।

पासपोर्ट सेवा केंद्र की ओर से इन दोनों मामलों में फौरी तौर पर ही पासपोर्ट जारी कर दिया जाता है। इसी तरह अगर बच्चों के लिए पासपोर्ट बनवाना है तो भी पुलिस वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती है। अभिभावकों के ही दसतावेज पर बच्चों का पासपोर्ट बनता है।

कितना वक्त लगता है | how to time expend

आम लोगों के जेहन में सबसे पहले एक बात होती है कि पासपोर्ट जारी होने में कितना वक्त लगता है। हम आपको बता रहे हैं कि किस स्टेज पर पासपोर्ट के लिए कितने दिनों तक जांच होती रहती है

  • प्री पीवी : पुलिस वेरिफिकेशन के लिए आमतौर पर तीन दिनों का समय दिया जाता है। तीन दिनों के अंदर सभी तरह की जानकारियां अपडेट करनी होती हैं
  • पोस्ट पीवी :  सामान्य और तत्काल पासपोर्ट के लिए भी तीन दिनों का समय दिया जाता है। इस डेट में सारी जांचें पूरी करनी होती हैं। इसके बाद रिपोर्ट को आगे बढ़ा दिया जाता है
  • नो पीवी :  इस श्रेणी में सामान्य पासपोर्ट के लिए तीन दिनों का समय रखा गया है, जबकि तत्काल श्रेणी में पासपोर्ट के लिए एक दिन का समय दिया गया है। यानी एक दिन में सारी जांचें पूरी करके देनी होती है
  • कंप्लेक्स अप्लीकेशन :  डुप्लीकेट पासपोर्ट के लिए तीस दिन का समय निर्धारित किया गया है। इसी तरह पासपोर्ट में किसी तरह के बदलाव, दस्तावेज के मामले में या फिर नाम बदलने में, इन सभी प्रक्रिया में तीस दिन का समय तय किया गया है
  • अन्य कारण : अगर फार्म के साथ किसी वजह से गलत दस्तावेज अटैच हो गए हैं तो उसमें बदलाव के लिए अलग से समय दिया जाता है।
  • स्पीड पोस्ट :  पासपोर्ट अगर प्रिंट होकर आ गया है तो उसे डिस्पैच फार्म में डाल दिया जाता है। इसके साथ ही पासपोर्ट को स्पीड पोस्ट से आवेदक के पते पर भेज दिया जाता है। अगर आप अपने पासपोर्ट के बारे में जानना चाहते हैं तो इंडिया पोस्ट वेबसाइट पर सर्च कर सकते हैं। अगर पासपोर्ट घर पर आ गया है तो आप खुद ही पासपोर्ट रिसीव करें। पोस्ट मैन को साफ हिदायत दी गई है कि वह किसी दूसरे व्यक्ति को पासपोर्ट न दे।

About Ashutosh Srivastava

हिंदी पत्रकारिता में 21 वर्ष का अनुभव। दैनिक जागरण और अमर उजाला में लंबा समय दिया।

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