Breaking News
Home / pradhanmantri yojana / मत्स्य पालन योजना । Matsya palan yogana in hindi

मत्स्य पालन योजना । Matsya palan yogana in hindi

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मछुआरों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य मात्सिकी सेक्टर का विकास करना और मछुआरों व किसानों की आजीविका में सहायता करना है। यह योजना मछुआरों एवं मत्स्य पालन करने वाले किसानों के कल्याण और समग्र विकास के लिए समर्पित है।

fish

अब तक मछुआरों और मत्स्य पालन करने वाले किसानों पर ध्यान देने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से कोई योजना नहीं थी। मत्स्य पालन राज्यों का ही विषय रहा है। समुद्रों से मछली पकड़ने वालों को कई तरह की परेशानियां पेश आती हैं लेकिन इसका समाधान केंद्र सरकार की ओर से नहीं किया जा पाता था, सिवाए समुद्री सीमा के उल्लंघन के। कमोवेश यही स्थिति उन किसानों की भी थी जो तालाबों में मछली पालते हैं।

मोदी सरकार ने किसानों की आय को कुछ वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। यह काम अकेले कृषि से ही नहीं हो सकता। किसानों को खेती के साथ-साथ पशुपालन या अन्य व्यवसायों से भी जोड़ने की कोशिश इसी योजना का नतीजा है। सरकार की मंशा है कि किसानों को मत्स्य पालन के लिए प्रेरित किया जाए ताकि उनकी आय में इजाफा हो।

इस पहल का असर अब दिखने लगा है। किसान अपनी ही भूमि में तालाब बनाकर मछली पालने की योजना की ओर आकर्षित हुए हैं। मत्स्य पालन से होने वाली आय ने कृषि उपज से होने वाली आय को पीछे छोड़ दिया है। सरकार की कोशिश है कि छोटे किसान जिनके पास कम भूमि है, वे मछली पालन से जुरूर जुड़ें ताकि उनकी आय में इजाफा हो सके। सरकार किसानों को आर्थिक मदद देने के साथ ही मत्स्य पालन का प्रशिक्षण भी दे रही है। अब तक लाखों किसान इस योजना से जुड़कर अपनी जिंदगी को बदल रहे हैं।

प्रमुख योजनाएं

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले मत्स्य पालन विभाग की ओर से 3000 करोड़ रुपये की लागत से नीली क्रांति योजना को लागू किया है। यह योजना पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित है। राज्य सरकारों के मत्स्य पालन विभाग इससे मिलने वाली राशि का उपयोग किसानों को मत्स्य पालन के लिए प्रेरित करने व इस व्यवसाय को शुरू करने में मदद के रूप में कर रहे हैं। इस योजना से लाखों किसान जुड़ चुके हैं और कई अन्य ने भी मत्स्य पालन से होने वाले लाभ को देखते हुए इसे शुरू करने की सहमति प्रदान की है।

एफआईडीएफ फंड की स्थापना

केंद्र सरकार ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (एफआईडीएफ) फंड की स्थापना की है। इस फंड की स्थापना वित्तीय वर्ष 2018-19 में की गई थी जिसका लाभ किसानों को मिलना शुरू हो गया है। इस फंड के लिए केंद्र सरकार ने 7522 करोड़ रुपये का योगदान दिया है।

मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ

केंद्र सरकार ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए मछुआरों के लिए भी किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से मछुआरों और मत्स्य पालन करने वाले किसानों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जा रही है।

क्रेडिट कार्ड के जरिए मिलने वाली मदद से किसान तालाब का निर्माण और मछली को खरीद सकते हैं। बाद में व्यवसाय स्थापित होने पर होने वाली कमाई से किसान कर्ज को भी चुकता कर सकते हैं।

नौकाओं की खरीद में सहायता

नदियों, तालाबों व समुद्र से मछली पकड़ने वाले किसानों को भी केंद्र सरकार आर्थिक सहायता मुहैया करवा रही है। सरकार ने नौकाओं की खरीद मे सहायता देना शुरू कर दिया है। ट्रेनिंग के जरिए पारंपरिक मछुआरों को डीप सी फिशिंग के गुर भी सिखाए जा रहे हैं। उनको बताया जा रहा है कि गहरे समुद्र से कम लागत से वे कैसे कमाई को बढ़ा सकते हैं। नौकाओं की बनवाट, आकार व जाल को उपयोग करने के तरीके भी मछुआरों को सिखाए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार ने समुद्री मात्स्यिकी नीति 2017 की घोषणा की है।

उत्पादन में हुई वृद्धि

केंद्र सरकार की योजनाओं का ही नतीजा है कि मत्स्य उत्पादन में तेजी के साथ वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष की ही बात करें तो हर वर्ष 7.14 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2017-18 में अब तक का सर्वोच्च 126.14 लाख टन मछली का उत्पादन दर्ज किया गया। सबसे अच्छा प्रदर्शन पूर्वी तट के समुद्री इलाकों में हुई है। इसमें आंध्र प्रदेश, उड़ीसा व तमिलनाडु राज्यआते हैं।

पश्चिमी तट के केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र व गोवा जैसे राज्यों में भी मत्स्य पालन में वृद्धि दर्ज की गई है। इसकी वजह यह है कि इन समुद्र तटीय इलाकों में मछली खाने वाले लोगों की आबादी ज्यादा है। गुजरात में मछली खाने वाले लोगों की संख्या कम है तो इसका असर वहां के उत्पादन पर भी दिखा है। हालांकि गुजरात से मछली का निर्यात अब भी बड़ी संख्या में हो रहा है।

निर्यात में भी बढ़ोतरी

मत्स्य पालन में सिर्फ उत्पादन ही नहीं बढ़ा है। भारतीय मछुआरों की मेहनत की बदौलत मछली का निर्यात भी चार साल में तेजी के साथ बढ़ा है। पिछले चार वर्ष में औसतन 11.31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह अब तक की सर्वाधिक वृद्धि है। वर्ष 2017-18 में मात्स्यिकी क्षेत्र में निर्यात से सर्वाधिक 45106.89  करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। यह अब तक का रिकार्ड है। भारत ने मछली निर्यात कर कभी इतनी कमाई नहीं की थी। आने वाले वर्षों में इसमें और वृद्धि होगी।

इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत

भारत सरकार की ओर से चलाई जा रही मत्स्य पालन योजना का लाभ उठाना है तो आपके पास कुछ पेपर्स जरूर होने चाहिए। यह पेपर्स हैं

  • आधार कार्ड
  • वोटर आईडी कार्ड
  • मत्स्य पालन का लाइसेंस, अगर हो
  • व्यवसाय की योजना
  • नाव की उपलब्धता व नाव का आयु प्रमाण पत्र
  • जाल का प्रकार

About Ashutosh Srivastava

हिंदी पत्रकारिता में 21 वर्ष का अनुभव। दैनिक जागरण और अमर उजाला में लंबा समय दिया।

Check Also

idbi

आईडीबीआई भर्ती 2019 । IDBI Recruitment 2019

बैंकों में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट …