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अल्पसंख्यक स्वरोजगार ऋण योजना । minority self employment loan scheme in Hindi

उत्तराखंड सरकार अल्पसंख्यक समाज के उत्थान के लिए भी गंभीर है। सरकार की ओर से अल्पसंख्यक स्वरोजगार ऋण योजना शुरू की गई है। इस योजना का लाभ सिर्फ अल्पसंख्यक समाज के लोग ही हासिल कर सकते हैं। उन्हें कारोबार शुरू करने के लिए लाखों रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। कारोबार कौन सा करें, इसके लिए भी विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि इस योजना में क्या है और आप इससे किस तरह फायदा हासिल कर सकते हैं।

अल्पसंख्यक स्वरोजगार ऋण योजना

उत्तराखंड सरकार की ओर से शुरू की गई अल्पसंख्यक स्वरोजगार ऋण योजना के तहत प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजारने वाले अल्पसंख्यक समाज के लोगों को कारोबार शुरू करने के लिए ऋण प्रदान किया जाएगा। लोग इस योजना के तहत बीस हजार रुपये से लेकर दस लाख रुपये तक का ऋण हासिल कर सकते हैं। लोगों को 40 फीसदी ऋण के लिए छह प्रतिशत ब्याज देना होगा। जबकि योजना राशि की 25 फीसदी रकम अनुदान के रूप में मिलेगी। सरकार इस रकम को न तो वापस लेगी और न ही इसपर किसी तरह का ब्याज मान्य होगा। पंद्रह फीसदी की राशि लोगों को अंशदान के रूप में खुद लगानी होगी। इस योजना के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लोगों का चयन किया जाएगा। सरकार जिलेवार कोटा भी तैयार कर रही है।

योजना के लिए पात्रता

  • स्वरोजगार ऋण योजना का लाभ उन्हीं को मिलेगा, जो मूल रूप से उत्तराखंड के निवासी होंगे। किसी दूसरे प्रदेश के निवासियों को इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा।
  • इस योजना का फायदा सिर्फ उन्हीं को मिलेगा, जो अल्पसंख्यक समाज से जुड़े होंगे। दूसरे समाज के लोगों को इसका फायदा नहीं मिलेगा।
  • योजना का फायदा हासिल करने के लिए बीपीएल कार्ड धारकों की सूची में नाम होना जरूरी है। गैर बीपीएल कार्ड धारकों को इसका फायदा नहीं मिलेगा।
  • लाभार्थी का चयन जिला स्तर पर किया जाएगा। इसके लिए चयन समिति का गठन किया गया है। लोगों को साक्षात्कार की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

योजना के लिए दस्तावेज

  • उत्तराखंड में जो भी लोग इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उनके पास वोटर आईडी कार्ड होना चाहिए।
  • अगर किसी कारणवश उनके पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है तो वे आधार कार्ड की कॉपी भी लगा सकते हैं।
  • इसी तरह इस योजना के लिए उन्हें आय प्रमाण्पत्र बनवाना जरूरी है। सरकार ने आय प्रमाणपत्र को भी जरूरी कर दिया है।
  • पासपोर्ट साइज की फोटो भी फार्म के साथ अटैच करना होगा। लोगों को बीपीएल कार्ड की कॉपी भी फार्म के साथ अटैच करना होगा।
  • इसी तरह इस योजना का लाभ लेने के लिए लोगों को मूल निवास प्रमाणपत्र भी फार्म के साथ अटैच करना होगा।
  • बैंक विवरण भी देना होगा। सरकार की ओर से ऋण के लिए जो भी रकम मंजूर की जाएगी, वह सीधे बैंक खाते में ही ट्रांसफर की जाएगी।

ऑनलाइन आवेदन करें

  • उत्तराखंड सरकार की ओर से शुरू की गई इस योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
  • अगर आप ऑनलाइन आवेदन करना चाहते हैं तो आपको सरकार की अफीशियल वेबसाइट पर विजिट करना होगा।
  • इस वेबसाइट पर क्लिक करने के बाद आपको इसके होम पेज पर योजना का लिंक दिख जाएगा। इस पर क्लिक करना होगा। यहां नई विंडो ओपन हो जाएगी।
  • फार्म को पढ़ने के बाद आपसे इस योजना से जुड़ी जो भी जानकारी मांगी जा रही है, उसे फार्म पर दर्ज करें।
  • फार्म पर योजना से जुड़े जो भी कॉलम दिखाई पड़े, उसे सही-सही भरें। गड़बड़ी होने पर फार्म सबमिट नहीं होगा।
  • सभी कॉलम ठीक तरह से भरने के बाद आपको सबमिट का ऑप्शन दिखाई पड़ेगा, जिसपर क्लिक करना होगा।
  • सबमिट के ऑप्शन पर क्लिक करते ही फार्म भरने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। आप इसका प्रिंट आउट भी अपने पास रख सकते हैं।

ऑफलाइन आवेदन भी कर सकते हैं

  • उत्तराखंड सरकार की ओर से शुरू की गई अल्पसंख्यक स्वरोजगार ऋण योजना के लिए ऑफलाइन आवेदन भी किया जा सकता है।
  • अगर आप ऑफलाइन आवेदन करना चाहते हैं तो आपको उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विकास निगम के कार्यालय पहुंचना होगा।
  • यहां आपको ऋण योजना का फार्म मिल जाएगा। फार्म के सभी कॉलम को सही-सही भरें। उसपर जरूरी दस्तावेज अटैच करें।
  • फार्म पर अपनी पासपोर्ट साइज फोटो भी अटैच करें। इसके बाद फार्म को उसी कार्यालय में जमा कर दें। प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

कारोबार शुरू होगा आसान

उत्तराखंड में मौजूद अल्पसंख्यक समाज के जिन लोगों के पास रोजगार नहीं है, उन्हें इस योजना के तहत कारोबार से जोड़ा जाएगा। लोगों को इस योजना के तहत ऋण तो प्रदान किया जाएगा ही, कारोबार के बारे में भी बताया जाएगा। चयन समिति की तरफ से जब साक्षात्कार लिया जाएगा, उस दौरान लोगों से उनकी दिलचस्पी के बारे में पूछा जाएगा। अगर किसी कारोबार में ग्रोथ कम है, तो उन्हें दूसरा कारोबार शुरू करने का मशविरा भी दिया जाएगा। कुल मिलाकर सरकार की मंशा यही है कि अल्पसंख्यक समाज के गरीब लोगों के पास खुद का कारोबार हो, ताकि उन्हें दूसरे के यहां चाकरी न करना पड़े।

About Mohd. razi

हिंदी पत्रकारिता में 14 वर्ष का अनुभव। दैनिक जागरण और अमर उजाला में काफी वक्त दिया।

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