Home / pradhanmantri yojana / sarkari yojana / pradhanmantri yojana / मुद्रा योजना । Mudra yojana in hindi

मुद्रा योजना । Mudra yojana in hindi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जिस योजना की आज कल सबसे ज्यादा चर्चा होती है, आज हम उसी के बारे में आपको विस्तार से बताएंगे। जिस योजना की हम बात कर रहे हैं, उसे मुद्रा योजना के नाम से जाना जाता है। जब भी विपक्ष बेरोजगारी की बात उठाता है तो प्रधानमंत्री व उनके मंत्री इसी योजना का नाम लेकर सबका मुंह बंद कर देते हैं। इस योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक बेरोजगार युवकों को 10 हजार से लेकर 10 लाख रुपये तक का लोन मुहैया कराने का दावा सरकार की ओर से किया जाता है।

mudra

इस योजना के तहत स्वरोजगार शुरू करने के लिए बैंकों की तरफ से बिना किसी गारंटी के लोन उपलब्ध कराया जाता है। मुद्रा योजना का पूरा नाम है माइक्रो यूनिट डेवलेपमेंट रिफाइनेंस एजेंसी यानि MUDRA। आज से पहले आप लोगों ने इस योजना का पूरा नाम शायद ही सुना होगा। तो मिली न आपको एक काम की जानकारी। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से उसका फोकस स्वरोजगार पर ही था। सरकार का कहना है कि युवा नौकरी के पीछे भागने की जगह अपना कारोबार शुरू करें और नौकरी मांगने की जगह नौकरी देने वाला बनें। प्रधानमंत्री कई मंच से इस बात को कह चुके हैं।

सरकार को मुद्रा योजना शुरू करने का विचार नेशनल सैंपल सर्वे की 2013 की रिपोर्ट मिलने के बाद आया। सर्वे में बताया गया था कि देश भर में 5 करोड़ लघु व्यावसायिक इकाइयां हैं जिनका स्वामित्व एकल है। यानि कोई एक व्यक्ति इन इकाइयों को चला है। इसमें कंस्ट्रक्शन से लेकर रिटेल तक का काम हो रहा है। इन इकाइयों ने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कई करोड़ लोगों को रोजगार भी दे रखा है।

सरकार का मत बना कि अगर इन इकाइयों के प्रोत्साहन के लिए लोन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए तो इससे और रोजगार का सृजन होगा और नए लोग भी अपना काम शुरू करने को उत्सुक होंगे। स्वरोजगार को प्रोत्साहन देने के लिए अप्रैल 2015 में माइक्रो यूनिट्स एंड रिफाइनेंस एजेंसी यानि मुद्रा योजना के तहत लोन देने की व्यवस्था की गई। पहले बजट में इसके लिए 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। सरकार का दावा है कि मुद्रा योजना के तहत अब तक 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लोन वितरित किया जा चुका है।

बांग्लादेश से मिला था मुद्रा योजना का आइडिया

वैसे यह कहना गलत नहीं होगा की भारत सरकार को मुद्रा योजना को शुरू करने का आइडिया बांग्लादेश से मिला था। बांग्लादेश के प्रो. यूनुस ने इस योजना का प्रस्ताव दिया था। इस आधार पर बांग्लादेश सरकार ने छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने के लिए छोटे कर्ज देने की व्यवस्था शुरू की। इससे घनी आबादी वाले बांग्लादेश में बेरोजगारी की समस्या कम हुई और अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई। अब बांग्लादेश अविकसित देशों की श्रेणी से बाहर निकलने की ओर बढ़ चला है।

आने वाले कुछ वर्षों में बांग्लादेश विकासशील देशों की श्रेणी में आ जाएगा। वहां की अर्थव्यवस्था में सुधार होने की वजह यह भी है कि रेडिमेड कपड़ों की मैन्युफैक्चरिंग करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने वहां पर उद्योग लगाने शुरू कर दिए हैं। इसका सबसे कारण यह बताया जाता है कि बांग्लादेश में मजदूरी की दर भारत जैसे देशों की तुलना में काफी कम है।

पात्रता

मुद्रा योजना के तहत हर वह व्यक्ति लोन ले सकता है जो कुटीर उद्योग चला रहा है या किसी के साथ साझेदारी में कोई छोटी इकाई चला रहा है। इसमें दुकान, मोमबत्ती कारखाना, मसाला फैक्ट्री या आटा की चक्की भी हो सकती है।

ऐसे मिलता है लोन

  • मुद्रा योजना के तहत लोन प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले बैंक से संपर्क करना होगा।
  • उसे ऋण आवेदन पत्र जमा भरकर जमा करना होगा साथ ही व्यवसाय से जुड़े सारे दस्तावेजों की फोटो कॉपी भी जमा करानी होगी।
  • इसके बाद बैंक कागजातों की जांच करवाएगा और यह तय करेगा कि आपको अपने व्यवसाय को सुधारने के लिए कितने रुपये का लोन चाहिए।
  • कर्ज की मंजूरी मिलते ही आपको इसकी सूचना दे दी जाएगी और रकम को आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

आवेदन के लिए यह पेपर्स होने चाहिए

  • पैन कार्ड
  • आधार कार्ड
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • वोटर आईडी कार्ड
  • पासपोर्ट
  • एससी-एसटी व ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए जाति प्रमाण पत्र
  • अगर किसी बैंक से पहले कर्ज लिया होगा तो इसकी भी जानकारी देनी होगी
  • दो लाख रुपये से अधिक के कर्ज के लिए दो साल का इनकम टैक्स रिटर्न
  • प्रोजेक्ट रिपोर्ट
  • बैलेंस शीट
  • साझे में चलने वाली कंपनी की डीड व मेमोरेंडम की फोटो कॉपी
  • दो फोटो
  • व्यवसायिक इकाई का लाइसेंस
  • पंजीकरण प्रमाण पत्र
  • स्वामित्व निर्धारण के लिए दस्तावेज

तीन वर्गों में विभाजन

मुद्रा लोन को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है।

शिशु लोन

इस कैटेगिरी के अंतर्गत छोटे स्तर पर काम शुरू करने वालों को 50 हजार रुपये तक का कर्ज दिया जाता है।

किशोर लोन

इस योजना के तहत 50 हजार से लेकर पांच लाख रुपये तक कर्ज दिया जाता है। इसके तहत लोगों को अपने कारोबार को विस्तार देना होता है।

तरुण लोन 

इसकी सीमा पांच लाख से लेकर 10 लाख रुपये के बीच है। इसके अंतर्गत भी कारोबार को और बढ़ाने के लिए लोन दिया जाता है।

(सबसे खास बात यह है कि मुद्रा लोन के तहत किसी भी तरह की गारंटी नहीं देनी पड़ती है)

इन लोगों को पड़ती है जरूरत

मुद्रा योजना उन लोगों के जीवन में परिवर्तन ला रही है जिन्होंने नौकरी के लिए दूसरों की ओर देखने की जगह खुद का काम शुरू करने का फैसला किया। इस योजना का लाभ छोटे दुकानदारों, फल व सब्जी विक्रेता, फेरी वाले, हेयर कटिंग सैलून, बुटीक, टू व्हीलर रिपयेरिंग सेंटर, ऑटो पार्ट्स विक्रेता, ट्रांसपोर्ट, स्वयं सहायता समूह, बुनकरों, दर्जी, जूस विक्रेता, छोटे ठेकेदार, बेकरी, ऑटो ड्राइवर, ई रिक्शा चालक, चाय या नाश्ते के छोटी दुकान वालों, बिजली कारीगरों, मोमबत्ती और मसाला फैक्ट्री चलाने वालों ने उठाया और अपने कारोबार को विस्तार दिया।

ऐसे लोगों को मुनाफा बढ़ा और उन्होंने कई लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया। लोगों को बैंकों की तुलना में काफी कम दर पर कर्ज मुहैया कराया गया। अधिकांश लोग बैंकों के कर्ज देने के कठिन नियमों के चलते कर्ज हासिल कर अपने कारोबार को गति नहीं दे पाते थे। बैंक भी बिना गारंटी के या संपत्ति को बंधक बनाए कर्ज नहीं देते हैं।

अगर किसी को बैंक से कर्ज मिल भी जाता था तो उसको मोटी ब्याज दर का भुगतान करना होता था। मुद्रा लोन की दूसरी सबसे बड़ी खूबी है कि इसमें ब्याज दर काफी कम होती है। जिन लोगों के लिए बैंकों के दरवाजे नहीं खुलते थे, उनको मामूली जरूरतों को पूरा करने के लिए साहूकारों के चंगुल में फंसकर अपनी जीवन भर की कमाई लुटा देनी पड़ती थी। मुद्रा योजना आने के बाद साहूकारों के चंगुल में फंसने की घटनाओं में कमी आई है।

मुद्रा योजना के अंतर्गत सबसे अधिक संख्या शिशु लोन पाने वालों की है। जिन्होंने 50 हजार रुपये तक का कर्ज लेकर अपने ही गांव या कस्बे में बिजली की दुकान से लेकर, पेंट, चाय, मोबाइल रिपेयिरंग व रिचार्ज, मोबाइल एसेसरीज, ऑटो एसेसरीज, ट्यूबलेस टायर के पंक्चर बनाने का प्लांट, बाइक रिपेयिरंग, जनरल स्टोर, चाय-नाश्ते की दुकानों को शुरू किया। लोग आसानी से कर्ज का भुगतान भी कर दे रहे हैं।

मुद्रा योजना के फायदे

  • इससे देश में कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
  • जो नौजवान नौकरी के चक्कर में इधर उधर भटकते हैं, वे अपना काम शुरू कर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकते हैं।
  • इससे हुनरमंद लोगों की संख्या बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश सरकार भी वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना के तहत छोटे उद्यमियों को मदद दे रही है।
  • एक तथ्य यह है कि बड़े उद्योगों में जहां सवा करोड़ लोगों को रोजगार मिला है, वहीं कुटीर उद्योग 12 करोड़ लोगों का पेट भर रहे हैं।
  • मुद्रा योजना आने के बाद कुटीर उद्योगों को संजीवनी मिली है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खुदरा व्यापार में उतरने के बाद रिटेल कारोबार में मंदी आई थी।
  • इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और इसका फायदा उपभोक्ता को भी मिला है। कंप्टीशन अधिक होने के कारण रोजमर्रा की जरूरतों के सामानों की कीमत में भी बढ़ोतरी नहीं हो रही है। खुदरा महंगाई की दर 10 साल के न्यूनतम स्तर पर आ गई है।

About Ashutosh Srivastava

हिंदी पत्रकारिता में 21 वर्ष का अनुभव। दैनिक जागरण और अमर उजाला में लंबा समय दिया।

Check Also

idbi

आईडीबीआई भर्ती 2019 । IDBI Recruitment 2019

बैंकों में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट …