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नंदा देवी कन्या योजना । uttarakhand nanda devi kannaya yojana in Hindi

बेटियां मजबूत होंगी तो परिवार मजबूत होगा। परिवार के साथ समाज भी मजबूत होगा। सिर्फ समाज और परिवार ही क्यों, बल्कि पूरा देश मजबूत होगा। उत्तराखंड सरकार इस दर्शन पर यकीन रखती है। यही वजह है कि सरकार ने प्रदेश की बेटियों के लिए नंदा देवी कन्या योजना की शुरुआत की है।

इस योजना के तहत कन्याओं की आर्थिक मदद तो की जाएगी ही, उनकी शिक्षा और सेहत का ख्याल भी रखा जाएगा। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि उत्तराखंड सरकार की इस योजना में क्या है और आप इससे किस तरह फायदा हासिल कर सकते हैं।

नंदा देवी कन्या योजना का ऐसे लें लाभ

उत्तराखंड सरकार की ओर से शुरू की गई नंदा देवी कन्या योजना पूरी तरह से बालिका उत्थान के लिए है। इस योजना के तहत कन्या के जन्म पर पहले पांच हजार रुपये प्रदान किए जाते थे। सरकार ने इस राशि में तीन गुने की बढ़ोतरी कर दी है। इस योजना के तहत कन्या के जन्म पर अब पंद्रह हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। पांच हजार रुपये का चेक अभिभावकों को कन्या के जन्म पर दिया जाएगा। जबकि बची हुई रकम को कन्या के 18 साल पूरे होने पर रिलीज किया जाएगा। खास बात यह है कि इसमें ब्याज धन भी शामिल रहेगा। यह रकम बालिका के खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

बीपीएल कार्ड धारकों को मिलेगा फायदा

उत्तराखंड सरकार ने इस योजना से जुड़ा शासनादेश जारी कर दिया गया है। योजना का लाभ बीपीएल कार्ड धारकों की सूची में शामिल परिवार को मिलेगा। बीपीएल कार्ड धारकों की सूची में शामिल परिवार के साथ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी इस योजना का फायदा मिल सकेगा। शहरी इलाकों में रहने वाले जिन परिवार की सालाना आय 42 हजार या इससे कम है, उन्हें भी इस योजना में शामिल किया गया है। इसी तरह ग्रामीण इलाकों में रहने वाले जिन परिवार की सालाना आय 36 हजार या इससे कम है, उन्हें भी इस योजना का फायदा दिया जाएगा।

योजना के लिए पात्रता

  • उत्तराखंड सरकार की ओर से शुरू की गई इस योजना का लाभ वही लोग हासिल कर सकते हैं, जो मूल रूप से इसी राज्य के निवासी हों।
  • दूसरे प्रदेश के निवासियों को इस योजना के तहत किसी भी तरह लाभाविंत नहीं किया जा सकता है। शासन ने गाइडलाइन जारी कर दिया है।
  • इस योजना का लाभ बीपीएल कार्ड धारकों की सूची में शामिल परिवार वालों को दिया जाएगा। बीपीएल कार्ड धारकों के अलावा आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लोग भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
  • शहरी इलाकों में जिन परिवार की सालाना आय 42 हजार और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले जिन परिवार की सालाना आय 36 हजार है, उन्हें भी इस योजना के तहत लाभाविंत किया जाएगा।
  • कन्या के जन्म के बाद एक साल तक इस योजना के लिए आवेदन किया जा सकता है। यानी अगर किसी की बेटी हुई है तो वह एक साल के अंदर के समय तक इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है।

योजना के लिए दस्तावेज

  • उत्तराखंड में जो भी लोग इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उनके पास वोटर आईडी कार्ड होना चाहिए।
  • अगर किसी कारणवश उनके पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है तो वे आधार कार्ड की कॉपी भी लगा सकती हैं।
  • इसी तरह इस योजना के लिए उन्हें आय प्रमाण्पत्र बनवाना जरूरी है। सरकार ने आय प्रमाणपत्र को भी जरूरी कर दिया है।
  • पासपोर्ट साइज की फोटो भी फार्म के साथ अटैच करना होगा। लोगों को बीपीएल कार्ड की कॉपी भी फार्म के साथ अटैच करना होगा।
  • इसी तरह इस योजना का लाभ लेने के लिए लोगों को मूल निवास प्रमाणपत्र भी फार्म के साथ अटैच करना होगा।
  • बैंक विवरण भी देना होगा। 18 साल पूरे होने पर बालिका का खाता बैंक में खुलवाना होगा। पैसे सीधे बैंक में ही ट्रांसफर किए जाएंगे।

ऑनलाइन आवेदन करें

  • उत्तराखंड सरकार की ओर से शुरू की गई नंदा देवी कन्या योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
  • अगर आप ऑनलाइन आवेदन करना चाहते हैं तो आपको सरकार की अफीशियल वेबसाइट पर विजिट करना होगा।
  • इस वेबसाइट पर क्लिक करने के बाद आपको इसके होम पेज पर योजना का लिंक दिख जाएगा। इस पर क्लिक करना होगा। यहां नई विंडो ओपन हो जाएगी।
  • फार्म को पढ़ने के बाद आपसे इस योजना से जुड़ी जो भी जानकारी मांगी जा रही है, उसे फार्म पर दर्ज करें।
  • फार्म पर योजना से जुड़े जो भी कॉलम दिखाई पड़े, उसे सही-सही भरें। गड़बड़ी होने पर फार्म सबमिट नहीं होगा।
  • सभी कॉलम ठीक तरह से भरने के बाद आपको सबमिट का ऑप्शन दिखाई पड़ेगा, जिसपर क्लिक करना होगा।
  • सबमिट के ऑप्शन पर क्लिक करते ही फार्म भरने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। आप इसका प्रिंट आउट भी अपने पास रख सकते हैं।

योजना का मकसद

उत्तराखंड सरकार की ओर से शुरू की गई नंदा देवी कन्या योजना का मकसद बालिकाओं को आर्थिक सपोर्ट प्रदान करना है। इस योजना के तहत अभिभावकों का भी ख्याल रखा जा रहा है। गौरतलब है कि कन्या के जन्म पर पांच हजार रुपये की राशि चेक के माध्यम से सीधे अभिभावकों को प्रदान की जाएगी। इसका मकसद उनके खर्च को कम करना है। डिलेवरी के वक्त अस्पतालों में काफी पैसे खर्च हो जाते हैं। इसको ध्यान में रखकर ही अभिभावकों को पांच हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके बाद जो रकम बचेगी, वह ब्याज सहित बालिका के बैंक खाते में उस वक्त ट्रांसफर की जाएगी, जब वह अपनी जिंदगी के 18 साल पूरे कर चुकी होगी। ऐसा इसलिए ताकि बालिका इस पैसे का इस्तेमाल अपनी पढ़ाई सहित दूसरी तमाम जरूरी चीजों के लिए कर सके।

 

About Mohd. razi

हिंदी पत्रकारिता में 14 वर्ष का अनुभव। दैनिक जागरण और अमर उजाला में काफी वक्त दिया।

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