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वोटर आईडी कार्ड क्या है, कैसे करें आवेदन | What is Voter Id, How to apply in Hindi

voter idहम दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं। ऐसा देश जहां पर लोगों को अपनी पसंद की सरकार चुनने का हक है। जिस भी पार्टी को सबसे अधिक सीटें मिलती हैं, उसे राष्ट्रपति पांच साल के लिए सरकार बनाने का न्योता देते हैं। जब कभी किसी दल के पास बहुमत के लिए जरूरी सीटें नहीं होतीं तो वह अन्य दलों के सहयोग से सरकार बनाता है। 1989 से लेकर 2014 तक लोगों ने खिचड़ी सरकारें ही देखीं। पहले जनता दल फिर बीजेपी और आखिर में कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन करके चुनाव लड़ा और सरकारें बनाईं। चुनाव के बाद भी कुछ छोटे दल सबसे बड़े दल के खेमे में आ जाते हैं। 25 साल बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है। इस तरह की चुनावी प्रक्रिया से देश के सभी राज्यों में भी सरकारें बनती और बिगड़ती रही हैं। लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को हुकूमत का हक मिल जाता है लेकिन यहां रहने वाला हर नागरिक जिसकी उम्र 18 वर्ष या इससे अधिक है, उसके पास भी वोट की ताकत है। इस ताकत का इस्तेमाल कर आप किसी का भी खेल बना या बिगाड़ सकते हैं। आप ऐसा तभी कर सकते हैं जब आपका नाम मतदाता सूची में हो और आपके पास वोटर आईडी कार्ड भी हो। अब वोटर आईडी कैसे बने और नाम मतदाता सूची में कैसे आए? यही सवाल आपके मन में आ रहा होगा। आज हम आपको वोटर आईडी से बनवाने के लिए बारे में विस्तार से बताएंगे। उससे पहले कुछ और जरूरी बातों को भी जान लीजिए।

फर्जी वोटिंग रोकने के लिए बने कार्ड | Cards made to stop fake voting

कहने को तो देश में हमारे और आपके वोट से सरकारें बनती हैं लेकिन चुनाव के दौरान होने वाली धांधली भी किसी से छिपी नहीं है। फर्जी मतदाता और फर्जी मतदान का कलंक हमारे ऊपर आजादी के बाद हुए पहले आम चुनाव से लगा हुआ है। अक्सर आप सुनते होंगे कि किसी के नाम पर कोई और वोट डाल आया। इस तरह की घपलेबाजी रोकने के लिए चुनाव आयोग के दिमाग में यह आइडिया आया कि क्यों न हर मतदाता को ऐसा पहचान पत्र दिया जाए जिसमें उसकी फोटो लगी हो और व उससे जुड़ी सारी जानकारियां हों। इससे यह होगा कि जिसके पास आईडी होगा, वही मतदान कर पाएगा। उसकी जगह पर कोई दूसरा वोट नहीें डाल पाएगा। पहले कार्ड बनाया जाए और फिर इसको मतदान के लिए अनिवार्य कर दिया जाए। यह काम आसान नहीं था और हर मतदाता तक वोटर आईडी कार्ड पहुंचाना टेढ़ी खीर साबित हुआ। जब पहली बार वोटर आईडी कार्ड बने तो तमाम तरह की गड़बडिय़ां सामने आईं। नाम किसी का और फोटो किसी की। 18 साल के युवक को 50 साल का बना दिया गया तो लाखों के पिता व पति के नाम ही गलत हो गए।

लंबे समय चली सुधार की प्रक्रिया | Long-term improvement process

तमाम गड़बडिय़ों के बाद भी वोटर आईडी कार्ड बनाने की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगी। दो दशक से इसमें सुधार हो रहा है। पिछली गड़बडिय़ों को तो सुधार गया ही, अब तो रंगीन कार्ड भी जारी किए जाने लगे हैं। जब तक सभी लोगों के वोटर आईडी कार्ड नहीं बन गए तब तक के लिए चुनाव आयोग ने वैकल्पिक आईडी कार्ड की व्यवस्था लागू की। सभी लोगों की आईडी बनने तक के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, राशनकार्ड, पासपोर्ट, बैंक पासबुक, सरकारी कर्मचारियों व पीएसयू के आईकार्ड समेत दर्जन भर विकल्प दिखाकर मतदान की सहूलियत दी गई। हालांकि इसके बाद भी फर्जी मतदान की शिकायतें आती रहीं। अब चुनाव आयोग इस स्थिति में पहुंच गया है कि देश के सभी लोकसभा, विधानसभा, पंचायत, नगर निकाय के चुनाव वोटर आईडी कार्ड से कराए जाने लगे हैं।

लाखों लोगों के नाम कटे | Millions of peoples name cut

जब से वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य किया गया है तब से फर्जी मतदान पर काफी हद तक रोक लगी है। लाखों फर्जी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं और जिन लोगों के नाम दो जगह जुड़े हुए थे, वह भी कट गए हैं। अब तो मतदाता स्लिप भी बीएलओ के जरिए चुनाव आयोग घर तक पहुंचाने लगा है। लोग एसएमएस के जरिए व इंटरनेट से भी आईडी नंबर डालकर पर्ची डाउनलोड कर सकते हैं। ईवीएम के इस्तेमाल से भी बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाओं पर रोक लगी है। अब बूथ पर जबरन कब्जा करने वाले भी फर्जी मतदान नहीं कर पाते क्योंकि एक वोट को डालने में एक मिनट का समय लगता है। अगर कहीं पर कैप्चरिंग की कोशिश होती है तो भी वह विफल हो जाती है। कैप्चरिंग करने वाले मतदान केंद्र से निकल भी नहीं पाते कि सुरक्षा बलों के हाथ उन तक पहुंच जाते हैं। निर्जन इलाकों में भी फर्जी मतदान अब संभव नहीं। अब कहा जा सकता है कि देश में काफी हद निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव होने लगे हैं। ईवीएम को लेकर लोगों के मन में जो शंकाएं थी, वह भी वीवीपैट से दूर होने लगी हैं। अगले चुनाव अब वीवीपैट से ही कराए जाएंगे। यह मशीन हर ईवीएम से जुड़ी होगी और मतदान के बाद लोगों को एक बॉक्स में पर्ची दिखेगी। इसमें प्रत्याशी का नाम व दल का चुनाव चिह्न बना होगा। लोगों को यह पता चल जाएगा कि उनका वोट किसको गया।

निरंतर चलती है प्रक्रिया | Continuous moving process

वोटर आईडी कार्ड बनाने व वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया कभी रुकती नहीं। भले ही लोकसभा, विधानसभा, निकाय व पंचायत चुनाव पांच साल में होते हों लेकिन आईडी बनाने का काम निरंतर चलता रहता है। जैसे ही कोई व्यक्ति 18 साल का होता है, उसका आईडी कार्ड बन सकता है और नाम मतदाता सूची में जुड़ सकता है। बीएलओ सर्वे करके नए मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ते रहते हैं लेकिन अगर आप इंतजार नहीं करना चाहते हैं तो आपके पास कई विकल्प मौजूद हैं। आप खुद ही मतदाता सूची में नाम जुड़वा सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों प्रक्रिया उपलब्ध है। वोटर आईडी कार्ड के लिए आपको क्या प्रक्रिया अपनानी है, इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।

ऑनलाइन प्रकिया | Online process

  1. सबसे पहले आप चुनाव आयोग की वेबसाइट को खोलें।
  2. आपको स्क्रीन पर ऊपर की तरफ ही एनरोल फॉर न्यू कार्ड का लिंक मिलेगा।
  3. इसको ओपन करें। आपसे ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर मांगा जाएगा। इसके बाद आपको राज्य सलेक्ट करना होगा।
  4. इसके तुरंत बाद आपको लॉगइन आईडी व पासवर्ड मिल जाएगा।
  5. आप लॉगइन करें और अपना नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि व पता भरें।
  6. इसके बाद आपको अपनी पासपोर्ट साइज की फोटो को स्कैन करके फार्म से अटैच करना होगा।
  7. आपसे एक बार डीटेल को कन्फर्म करने को कहा जाएगा। आप फिर से इसे चेक करें और कन्फर्म का बटन दबा दें।
  8. आपके कंप्यूटर स्क्रीन पर सक्सेस फुल सब्मिशन लिखा दिखाई देगा। आवेदन पत्र स्वीकार होने का मैसेज कंप्यूटर व ईमेल पर भी आ जाएगा।
  9. आप इस फार्म का प्रिंट निकालें और जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में जमा कर दें।
  10. आपको प्रिंट के साथ फोटो, नाम, जन्म तिथि, पहचान व पते का प्रमाण पत्र भी लगाना होगा।
  11. प्रिंट जमा करने के बाद इसमें लगाए गए दस्तावेजों की जांच होगी।
  12. जांच पूरी होने के बाद आपको एसएमएस व ईमेल के जरिए बता दिया जाएगा आपका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जा चुका है।
  13. इसके साथ ही आपको मतदाता संख्या भी मिल जाएगी। सूचना मिलने के कुछ दिन बाद ही बीएलओ वोटर आईडी कार्ड आपके घर पहुंचा देगा।
  14. कार्ड न पहुंचने की दशा में आप जिला निर्वाचन कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।

voter idऑफलाइन प्रक्रिया | Offline process

  • आप सबसे पहले चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाएं और फार्म नंबर छह को डाउनलोड कर लें। इस काम में आप साइबर कैफे की भी मदद ले सकते हैं।
  • आप इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं तो जिला निर्वाचन ऑफिस से भी फार्म नंबर छह को प्राप्त कर सकते हैं।
  • फार्म को हिंदी या अंग्रेजी में भर सकते हैं। अगर अंग्रेजी का प्रयोग कर रहे हैं तो सारे अक्षर कैप्टिल में ही लिखें।
  • फार्म में काटछांट न करें। अगर गलती हो जाती है तो दूसरा फार्म भरें।
  • काटछांट की वजह से आपका आवेदन पत्र निरस्त भी हो सकता है।
  • फार्म में अपनी एक फोटो लगाएं और पहचान, पते व जन्म तिथि के प्रमंाण पत्र के साथ इसे जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में जमा कर दें।
  • फार्म में मोबाइल नंबर व ईमेल एड्रेस लिखना न भूलें। चुनाव आयोग इसी के जरिए आपसे संपर्क करेगा।
  • फार्म जमा करने के कुछ ही दिनों के भीतर आपका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाएगा और बीएलओ कार्ड को घर पर पहुंचा देगा।
  • कार्ड न पहुंचने पर आप जिला निर्वाचन कार्यालय पर संपर्क करें। नामांकन संख्या के आधार पर आपको डुप्लीकेट वोटर आईडी कार्ड जारी कर दिया जाएगा।

वोटर आइडी के उपयोग | Use of voter Id

  1. भारत में वोटर आईडी कार्ड को पहचान पत्र के रूप में मान्यता मिली हुई है। हर जगह इसे स्वीकार किया जाता है। इसके जरिए आप ड्राइविंग लाइसेंस, आधार व पासपोर्ट भी बनवा सकते हैं।
  2. यह सुबूत है कि आप भारत में रहते हैं और रस्टिर्ड मतदाता हैं।
  3. यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो भी आप आईडी के जरिए मतदान के लिए आवेदन कर सकते हैं। आपका वोट बैलेट पर लिया जाएगा। जो जांच के बाद गिना जाएगा।
  4. आपके नाम से कोई भी व्यक्ति फर्जी मतदान नहीं कर सकेगा। आपका वोट देश को मजबूत सरकार देने के काम आएगा।
  5. वोटर आईडी कार्ड के जरिए ही आप आधार कार्ड के लिए एप्लाई कर सकते हैं।

ऑनलाइन आवेदन के फायदे | Benefits of Online Application

  • अगर आप वोटर आईडी कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं तो इसके बहुत फायदे हैं। ऑनलाइन आवेदन करने वालों की संख्या काफी कम है। इस वजह से आपका नाम बहुत ही कम समय में वोटर लिस्ट से जुड़ जाएगा और कार्ड भी आपको मिल जाएगा।
  • ऑनलाइन आवेदन करने से आप जिला निर्वाचन कार्यालय की लाइन और औपचारिकताओं से बच जाएंगे।
  • आपको ऑनलाइन आवेदन के बाद नामांकन नंबर भी मिल जाएगा। इससे आप कार्ड का स्टेटस भी चेक कर सकते हैं।
  • ऑनलाइन आवेदन करने वालों को वोटर आईडी कार्ड एक महीने में मिल जाता है जबकि ऑफलाइन आवेदन करने वालों को 9 से 10 महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है। इससे भी अधिक समय लग सकता है। हो सकता है कि फार्मों के बोझ के चलते वोटर आईडी बने ही न।

track statusऐसे चेक करें स्टेटस | How to check status

  1. सबसे पहले राष्ट्रीय वोटर सेवा पोर्टल की वेबसाइट को ओपन करें।
  2. इसमें वह आईडी दर्ज करें जो आपको आवेदन के वक्त दी गई है।
  3. आईडी दर्ज करने के बाद ट्रैक स्टेटस के बटन पर क्लिक करें।
  4. पल भर में कंप्यूटर के स्क्रीन पर आ जाएगा कि स्टेटस क्या है और कितने दिन में वोटर कार्ड आपके पास पहुंच जाएगा। अगर फार्म रिजेक्ट हो गया है तो भी आपको पता चल जाएगा। यह जानकारी भी मिल जाएगी कि फार्म क्यों रिजेक्ट हुआ है।

वोटर आईडी कार्ड के लिए लगाएं यह पेपर्स | These documents are required for voter Id

  • सबसे पहले आप चुनाव आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट को ओपन करें। इसमें आपको पता चल जाएगा कि पहचान, पते व जन्म तिथि के प्रमाण पत्र के रूप में कौन से दस्तावेज लगाने हैं।
  • नाम व पिता के नाम को सत्यापित करने के लिए आप हाईस्कूल का सर्टिफिकेट या मान्यता प्राप्त स्कूल की आईडी लगा सकते हैं।
  • पते के प्रमाण पत्र के लिए आप एलआईसी पॉलिसी, पिता का पहचान पत्र, राजपत्रित अधिकारी या तहसीलदार के लेटर पैड पर पता सत्यापित करने का आदेश बनवाकर भी जमा कर सकते हैं।

मोहल्लों में लगते हैं कैंप | Camps organized in colony

जिला निर्वाचन अधिकारी की तरफ से वोटर आईडी कार्ड बनाने के लिए समय-समय हर मोहल्ले में कैंप लगाए जाते हैं। कैंप सरकारी स्कूलों में ही लगाए जाते हैं। इसकी तारीख न्यूज पेपर्स में प्रकाशित करवाई जाती है। अक्सर कैंप चुनाव के छह महीने पहले ही लगाए जाते हैं। छुट्टियों के दिन लगने वाले कैंप में आपको बीएलओ मिलेगा। आप उसके पास वहीं पर भी फार्म जमा कर सकते हैं। वहीं पर आपकी फोटो भी खींची जाएगी। आप अपनी फोटो भी जमा कर सकते हैं। फार्म जमा हो जाने के बाद इसकी जांच करवाई जाएगी। सत्यापन के लिए बीएलओ आपके दिए गए पते पर पहुंचेगा और वहां पर भी आपसे प्रमाण पत्र की फोटो स्टेट मांगी जा सकती है।

यूनिवर्सिटी, कॉलेजों में भी लगते हैं कैंप | Camps organized in university and colleges

जो स्टूडेंट 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके होते हैं, उनके वोटर आईडी कार्ड बनाने के लिए चुनाव आयोग की ओर से यूनिवर्सिटीज व कॉलेजों में भी कैंप लगाए जाते हैं। क्षेत्र की किसी मशहूद हस्ती का इस्तेमाल छात्रों को जागरूक करने के लिए किया जाता है। उनको मतदातन के फायदे बताने के साथ ही मौके पर ही फार्म भी भरवाए जाते हैं। वहीं पर उनकी फोटो खींची जाती है व पते, पहचान व जन्म तिथि के प्रमाण पत्र को जमा करवा लिया जाता है। कुछ ही दिनों के भीतर नए मतदाताओं के पास कार्ड पहुुंच भी जाता है।

address correctionकैसे चेंज करवाएं पता | How to change address

मतदाताओं के साथ दिक्कत अक्सर पता बदलने की आती है। जो लोग नौकरी में होते हैं, उनके ट्रांसफर हो जाते हैं। स्टूडेंट्स व व्यापारियों को भी जरूरत के हिसाब से घर बदलना पड़ता है। ऐसे में आप क्या करेंगे? नहीं पता। चलिए हम ही बता देते हैं। पता बदलवाने की भी प्रक्रिया बड़ी आसान है। अगर आप ऐसा नहीं करना चाहते हैं तो आपको वोटर आईडी कार्ड में दर्ज पते पर ही मतदान करना होगा। ऐसा बहुत से लोग करते हैं। वह मतदान के लिए अपने घर पहुंच जाते हैं और वोट डालते हैं। अगर आप मतदान के दिन घर नहीं जा पाते हैं तो आपको अपना पता चेंज करवाना होगा। इसके लिए आपको संबंधित जिले के निर्वाचन अधिकारी के ऑफिस में जाकर नए पते का प्रमाण पत्र व वोटर आईडी की फोटो स्टेट को जमा करना होगा। जांच के बाद आपकी आईडी में नया पता जुड़ जाएगा। आपको यह जानकारी अपने जिले के निर्वाचन कार्यालय में भी देनी होगी कि आपका पता बदल गया है। सूचना मिलने के बाद आपका नाम पुरानी वोटर सूची से कट जाएगा।

दो पहचान पत्र बनवाने की गलती न करें | Don’t apply for two voter Id card

अगर आप सोचते हैं कि आप नए पते पर नया वोटर आईडी कार्ड बनवा लें तो यह गलत है। आप ऐसा करके बुरा फंस सकते हैं। आपने अगर दूसरी वोटर आईडी बनवाई तो यह पकड़ में आ जाएगी और आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। आपके लिए सबसे आसान तरीका यह है कि आप पहले पते बदलवाने के लिए आवेदन करें और पुरानी सूची से नाम काटने के लिए एप्लीकेशन दें। अगर दो पहचान पत्र बन गए तो, वोटर आईडी के जरिए जारी दूसरी प्रमाण पत्र भी निरस्त हो सकते हैं।

जन सुविधा केंद्र की भी लें मदद | Get help jan suvidha center

आप अगर भागदौड़ नहीं करना चाहते हैं और इंटरनेट से भी बचना चाहते हैं तो आपके पास एक और ऑप्शन है। आप अपने मोहल्ले, गांव या ब्लॉक के जन सुविधा केंद्र पर भी जाकर वोटर आईडी कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। आपको वहां पर भी जन्म, पते व पहचान का प्रमाण पत्र जमा करना होगा। फार्म जमा होने के बाद तीन महीने के भीतर सत्यापन करने के बाद कार्ड आपके घर के पते पर पहुंचा दिया जाएगा। कार्ड देने या तो ग्राम पंचायत का अधिकारी आएगा या बीएलओ। कार्ड न मिलने पर जन सुविधा केंद्र पर जाकर शिकायत भी दर्ज करवा सकते हैं। वहां पर आपको लॉगइन पासवर्ड के जरिए डुप्लीकेट भी जारी कर दिया जाएगा।

अगर न हो कोई पहचान पत्र | If no any Id proof

अक्सर लोगों के पास पहचान पत्र का भी संकट खड़ा हो जाता है। ग्रामीण इलाकों में ऐसे लोग बड़ी संख्या में मिल जाते हैं जिनके पास पहचान, पते व जन्मतिथि का कोई प्रमाण पत्र नहीं होता। ऐसे लोग अपने ग्राम प्रधान, पार्षद, विधायक या सांसद की भी मदद ले सकते हैं। अगर वहां तक भी नहीं पहुंच सकते तो अपने घर के मुखिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपके घर के मुखिया के पास मनरेगा जॉब कार्ड या राशनकार्ड है तो वह आपकी पहचान को प्रमाणित कर सकता है। उसके पास अगर पहले से वोटर आईडी कार्ड या आधार कार्ड है तो आपका काम और आसान हो जाएगा। बिना लंबी जांच के ही आपका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाएगा।

Aadhar cardआधार कार्ड है तो कोई दिक्कत नहीं | If Aadhar card then no problem

वैसे हमारी सलाह है कि आप ज्यादा चक्कर में न पड़ें। आप कोशिश करें कि आपका आधार कार्ड बन जाए। अगर आधार कार्ड आपके हाथ में आ गया तो इसकी मदद से आप कोई भी प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं। सिर्फ आधार के जरिए आपका बैंक एकाउंट भी खुल जाएगा और वोटर आईडी कार्ड भी बन जाएगा। अगर आपने बिना आधार के ही वोटर आईडी कार्ड बनवा लिया है तो भी आपको आधार कार्ड की जरूरत पड़ेगी। अब सरकार ने वोटर आईडी कार्ड को भी आधार से लिंक करना शुरू कर दिया है। इसलिए आप हमारी सलाह मानिए और पहले आधार कार्ड को बनवा लीजिए। अगर बिना आधार के वोटर कार्ड बनवा भी लिया तो वह आधार से लिंक न होने पर निरस्त कर दिया जाएगा।

About Ashutosh Srivastava

हिंदी पत्रकारिता में 21 वर्ष का अनुभव। दैनिक जागरण और अमर उजाला में लंबा समय दिया।

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